राजधानी देहरादून के निकट शनिवार को हुए बस हादसे के बाद घायल लोगों के इलाज में फेल अस्पताल की वजह से भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
रिसाणू के पास हुई बस दुर्घटना ने एक बार फिर जनजातीय क्षेत्र की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल दी है। दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हुए सात घायल लोगों को 150 किलोमीटर दूर दून रेफर करना पड़ा।
इस दौरान उनका जीवन जिंदगी और मौत के बीच झूलता रहा। अक्सर दुर्घटना के बाद ऐसी ही स्थिति का सामना करना पड़ता है। स्वास्थ्य सेवाओं के नाम पर त्यूनी तहसील क्षेत्र में मात्र एक चार बेड वाला प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हैं।
बिस्तरों की व्यवस्था नहीं
शनिवार को हुई दुर्घटना के बाद आनन-फानन में स्थानीय लोग और राजस्व पुलिस घायलों को पीएचसी त्यूनी लेकर पहुंचे, लेकिन सुविधाओं के अभाव में सात गंभीर घायलों को हायर सेंटर दून रेफर करना पड़ा। अन्य घायलों को बरामदे में लिटा कर या फिर खडे़-खडे़ ही उपचार कराना पड़ा।
अस्पताल में उनके लिए समुचित बिस्तरों की भी व्यवस्था नहीं थी। वहीं त्यूनी से 95 किलोमीटर दूर स्थित सीएचसी चकराता की बदहाल स्थिति भी किसी से छिपी नहीं है। भाजपा अनुसूचित जाति जनजाति मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष जयमोहन शर्मा का कहना है कि पूरे जनजातीय क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बदहाल हैं। मजबूरी में लोगों को विकासनगर और दून की दौड़ लगानी पड़ती है। कई गंभीर बीमार या फिर घायल बीच में ही दम तोड़ देते हैं।
एक्स-रे मशीन खराब
पीएचसी की एक्स-रे मशीन एक साल से खराब है, लेकिन विभाग ने इसकी अभी तक सुध नहीं ली। दुर्घटना में घायल हुए लोगों का उपचार शुरू करने से पहले सबसे ज्यादा जरूरत एक्स-रे मशीन की ही होती है, लेकिन मशीन खराब होने के कारण घायलों को रेफर करना पड़ता है।
डॉक्टरों का भी टोटा
केंद्र महज एक चिकित्सक और फार्मासिस्ट के भरोसे है। जबकि अस्पताल 180 गांवों के स्वास्थ्य सेवाओं का केंद्र बिंदु है। चिकित्सकों के दो पद खाली हैं। जिनमें एक महिला चिकित्सक शामिल हैं। फार्मासिस्ट का एक पद भी खाली पड़ा है।