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नशे का दुष्चक्र: देहरादून में खुलेआम चल रहे हुक्का बार, कानून मजबूर

Wed, 14 Aug 2019 09:29 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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प्रतीकात्मक
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राजधानी में नशे की अंधेरी गलियों में हुक्का संस्कृति तेजी से पनप रही है। बैन के बावजूद शहर में दर्जनों बार और रेस्तरां नियमों को ताक पर रखकर युवाओं को फ्लेवर्ड हुक्का परोस रहे हैं। कहने को यह फ्लेवर्ड है, लेकिन कई बार जब यहां कार्रवाई के लिए पुलिस या स्वास्थ्य विभाग पहुंचता है तो नशीले पदार्थों की मिलावट पाई जाती है। बावजूद इसके अभी तक इनके खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई।

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दरअसल, हुक्का बार के विरुद्ध समय समय पर स्वास्थ्य महकमा भी कार्रवाई करता है। लेकिन, विभाग के हाथ बंधे हैं। नियमानुसार इनका केवल 200 रुपये का चालान ही किया जा सकता है। अब रही बात पुलिस की तो यहां आकर कानून के हाथ भी छोटे पड़ जाते हैं। जिन बारों और रेस्तरां में हुक्का परोसा जा रहा है वे बेहद ऊंची पहुंच रखने वालों के हैं। सत्ता के गलियारों तक इनकी पहुंच होने के कारण पुलिस और प्रशासन भी इनके खिलाफ कार्रवाई से बचती है। जबकि, सुप्रीम कोर्ट के अनुसार हुक्का बार पूरी तरह से गैर कानूनी हैं।

गुगल पर भी मिलती है जानकारी 
पुलिस या प्रशासन को भले ही इनकी जानकारी न हो, लेकिन गुगल तक को इनके बारे में पता है। एड्रेस बार में हुक्का बार टाइप करते ही शहर के दर्जनों रेस्तरां और बार का पता एक पल में चल जाता है। खुल्लमखुल्ला चलते नशे के इन अड्डों पर यदा कदा कार्रवाई होती है, लेकिन सिर्फ नाम के लिए।
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नहीं लिखी होती चेतावनी 
हुक्का बार में किसी प्रकार की चेतावनी भी नहीं लिखी होती है। कोटपा की जिला सलाहकार अर्चना उनियाल का कहना है कि हुक्के में क्या परोसा जा रहा है इसकी जानकारी नहीं होती है। यह बालिगों या नाबालिगों किस वर्ग को परोसा जाना चाहिए इस बारे में भी कोई चेतावनी इन बारों में नहीं लिखी होती है। ये पूरी तरह बैन है, लेकिन कोटपा (सिगरेट एंड अदर टोबैको प्रोडक्ट्स एक्ट) के अंतर्गत इनके विरुद्ध कुल 200 रुपये का चालान ही किया जा सकता है। पुलिस या प्रशासन चाहे तो इन्हें सील किया जा सकता है।

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