अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा विभिन्न तीर्थों की समस्याओं के समाधान के लिए दिल्ली कूच का ऐलान किया है।
महासभा ने पुरोहितों के लिए राज्यसभा और विधान परिषदों में एक-एक सदस्य के मनोनयन की मांग की। पुरोहित्य कर्म का अधिकार केवल तीर्थ पुरोहित समाज को ही रहे। इसके लिए इस परंपरागत कार्य को पेटेंट कराने का निर्णय लिया गया। महासभा मठ मंदिरों के अधिग्रहण के खिलाफ भी संघर्ष करेगी।
दो सत्रों में गंगा स्वरूप आश्रम में चले अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा के राष्ट्रीय अधिवेशन में करीब 20 प्रस्ताव पारित हुए। बैठक की अध्यक्षता परिषद के अध्यक्ष महेश पाठक ने की। तीर्थ पुरोहितों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर दिल्ली में संसद तक कूच करने का ऐलान किया है।
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को मिलने के साथ-साथ दिल्ली के विज्ञान भवन में एक दिवसीय अधिवेशन का आयोजन किया जाएगा। इस कूच की तिथियां बाद में घोषित होगी। महासभा ने अध्यक्ष को राज्यसभा में प्रतिनिधित्व देने के साथ-साथ जिन राज्यों में विधान परिषद है, वहां एक-एक प्रतिनिधि राज्य पुरोहित महासभा से लेने का प्रस्ताव पारित किया है।
प्राचीन कर्मकांड को पेटेंट कराने की आवश्यकता
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साथ ही मांग की कि तीर्थों पर यह कार्य पुरोहित समाज द्वारा ही संपन्न कराया जाए। इसके लिए प्राचीन कर्मकांड को पेटेंट कराने की आवश्यकता है। महासभा को अधिकृत किया गया कि वह पेटेंट की कार्रवाई प्रारंभ करें।
महासभा ने तीर्थों पर स्थित मंदिरों के अधिग्रहण करने के विरुद्ध भी संघर्ष की घोषणा की। महासभा ने मथुरा के बिहारी जी मंदिर सहित अनेक मंदिरों का जिक्र किया, जिनका अधिग्रहण सरकारें करना चाहती थी। गंगा आदि पवित्र नदियों में बढ़ रहे प्रदूषण के खिलाफ महासभा अपने स्तर पर कार्रवाई करेगी।
यमुना नदी को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए आंदोलन करने का निर्णय लिया गया। महासभा ने विभिन्न राज्यों से आए पुरोहित, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और वृद्ध पुरोहितों को अंग वस्त्र व सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया। अधिवेशन में दुर्लभ मिश्र, श्रीकांत वशिष्ठ, पुरुषोत्तम शर्मा गांधीवादी, कृष्ण कुमार शर्मा, रामकुमार मिश्रा, शिवकुमार कौशिक, संजीव शुक्ल, धीरेंद्र उपाध्याय, पंकज झा, ठाकुर वैद्यनाथ, राजेश मिश्र आदि ने विचार रखे।