शहरभर में सभी जगह बुधवार को होलिका पूजन किया गया। अधिकतर लोगों ने शुभ समय में होलिका दहन किया। शाम साढ़े पांच बजे तक पूर्णिमा तिथि के समय होलिका दहन किया गया।
बुधवार को दोपहर में 12 से 1.30 बजे तक राहु काल में रोग की चौघड़िया होने से यह समय होलिका पूजन के लिए शुभ नहीं था। प्रात: 6 से 9 बजे तक एवं साढ़े दस से बारह बजे तक का समय होलिका पूजन के लिए शुभ था। शाम 3 से 6 बजे तक लाभ की चौघड़िया में भी शुभ समय था।
दो मुहूर्त में हुआ दहन
अधिकतर लोगों ने शुभ समय में ही होलिका पूजन किया। गोबर के खिलौने, तलवार आदि बनाकर माला में पिरोए गए और होलिका को चढ़ाया गया। नौ प्रकार के अन्न चढ़ाए गए एवं सूत से चार बार होलिका की परिक्रमा की गई। होलिकाओं के साथ ही भजन आदि बजते रहे।
अधिकतर लोगों ने शाम 4.55 से 5.30 बजे के बीच ही होलिका दहन किया, जो किसी कारण वश इस समय होलिका दहन नहीं कर सके उन्होंने दूसरे मुहूर्त में यानी रात में डेढ़ से तीन बजे तक होलिका दहन किया। होलिका दहन के साथ ही सभी ने एक-दूसरे को गुलाल का टीका लगाया और होली की बधाई दी।
यहां-यहां जलाई गई होलिका
घंटाघर, कालिका भवन मार्ग, इंदिरापुरम, दशमेश कॉलोनी, माजरा, पटेलनगर, क्लेमेंटटाउन, धर्मपुर, रायपुर, राजपुर आदि जगहों पर
मूसरी में जगह-जगह किया गया होलिका दहन
मसूरी नगर में रंगों के त्योहार की रौनक फीकी दिखी। होलिका की जगह-जगह पूजा-अर्चना कर शाम को दहन किया गया। स्कूलों में होली के अवकाश से पहले बच्चों ने जरूर एक-दूसरे पर अबीर-गुलाल लगाया। मगर शहर में कहीं पर भी सामूहिक रूप से रंगों की होली नही खेली गई।
अलबत्ता शहर के विभिन्न चौक-चौराहों पर होलिका दहन किया गया। पिक्चर पैलेस चौक, श्री सनातन धर्म मंदिर परिसर, लाइब्रेरी चौक पर महिलाओं ने पारंपरिक तौर पर होलिका की पूजा-अर्चना की। शाम को श्री सनातन धर्म मंदिर परिसर में होलिका दहन किया गया। इस बार मुहूर्त साढ़े तीन से पांच बजे के बीच था। पिक्चर पैलेस और अन्य स्थानों पर देर शाम को होलिका दहन किया गया।