चंद्रग्रहण होने के कारण ग्रहण नियम लागू होगा
आचार्य पवन पाठक बताते हैं कि तीन मार्च की प्रदोष बेला में होलिका दहन किया जा सकता था लेकिन चंद्रग्रहण होने के कारण ग्रहण नियम लागू होगा। शास्त्र में स्पष्ट है कि यदि चंद्रग्रहण है तो भद्रा रहित पूर्णिमा में रात्रि में होलिका दहन किया जाए।
यदि अगले दिन ग्रस्तोदय ग्रहण हो तो पूर्व दिवस में ही भद्रा त्यागकर रात्रि के चतुर्थ याम या विष्टिपुच्छ काल में होलिका दहन करना चाहिए। ऐसे में होलिका दहन तीन मार्च की सुबह 5:29 बजे से लेकर सूर्योदय से पहले तक किया जा सकेगा। दो मार्च को भद्रा शाम 05:56 बजे से शुरू होकर तीन मार्च को सुबह 05:28 बजे तक रहेगी।
शाम तक रहेगी पूर्णिमा, चार को ही मनेगा रंगोत्सव
ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, होलिका पूजन फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि की शाम या प्रदोष काल में किया जाता है और रंगोत्सव का पर्व अगले दिन यानी चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि को मनाया जाता है। इस बार तीन मार्च को पूर्णिमा तिथि शाम 5:56 बजे तक रहेगी। इसके कारण तीन मार्च को रंगोत्सव नहीं मनाया जाएगा। चार मार्च को चैत्र कृष्ण प्रतिपदा तिथि को ही रंगोत्सव मनाया जाएगा।
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शहर में सजीं होलिका
दून में होली के पर्व की तैयारी शुरू हो चुकी है। शहर में कई जगह होलिका भी सजा दी गई है। सहारनपुर रोड, निरंजनपुर, मंडी के पास, माजरा, परम विहार, प्रिंस चौक समेत कई जगह होलिका सजा दी गई हैं। इसके लिए सैकड़ों जगह दून में गाय के गोबर के कंडे और लकड़ियों का उपयोग कर होलिका तैयार की गई हैं।