देहरादून से 18 किमी दूर खाराखेत के नून नदी पर 1930 में गांधीजी के नमक सत्याग्रह के आह्वान पर आजादी के मतवालों ने नमक बनाकर ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी थी। वही स्थल आज उपेक्षा का दंश झेल रहा है। ऐतिहासिक स्थल होने के बाद भी यहां की सुध लेने वाला कोई नहीं है। यहां जाने वाली सड़क ऊबड-खाबड़ है तो जिस नदी में नमक बनाया गया था, वह भी गंदी हालत में है।
जब वर्ष 1930 में महात्मा गांधी के नेतृत्व में आजादी के दीवाने देशभर में नमक कानून तोड़ने के लिए एकजुट हो रहे थे तो 20 अप्रैल की दोपहर अखिल भारतीय नमक सत्याग्रह समिति के बैनर तले महावीर त्यागी व साथियों की अगुवाई में आजादी के मतवाले खाराखेत में एकत्रित हुए और नमक बनाकर ब्रिटिश हुकूमत को चुनौती दी। आंदोलनकारियों ने वहां सात मई 1930 तक छह टोलियों में नून नदी पर नमक बनाया और फिर शहर के टाउन हॉल में बेचते हुए गिरफ्तार हुए थे। खाराखेत में जिस स्थान पर नमक कानून तोड़ा गया था, वहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का स्तंभ बनाकर इस पर नमक आंदोलन में शामिल सभी स्वतंत्रता सेनानियों के नाम अंकित किए गए हैं। ऐहतिहासिक स्थल होने के बाद भी न तो यहां जाने के लिए सड़क है और न ही कोई अन्य सुविधाएं। यहां तक कि किस तरह से यहां पहुंचा जा सकेगा।
इन्होंने तोड़ा था नमक कानून
हुकम सिंह, अमर सिंह, रीठा सिंह, धनपति, रणवीर सिंह, कृष्ण दत्त वैद्य, नारायण दत्त, महावीर त्यागी, नरदेव शास्त्री, दाना सिंह, श्रीकृष्ण, नत्थूराम, ध्रुव सिंह, किशन लाल, गौतम चंद, चौधरी बिहारी, स्वामी विचारानंद, हुलास वर्मा, रामस्वरूप, नैन सिंह, किरण चंद आदि।