राजधानी देहरादून के शिमला बाईपास क्षेत्र में रहने वाले बृजेंद्र बिष्ट (70) बाथरूम में फिसल गए। उनका कूल्हा टूट गया। एम्स में उनका कूल्हा प्रत्यारोपण कराया गया। चलने में दुश्वारी होती है।
कहते हैं कि टायल्स गीली थी, पैर रखते ही फिसल गया। इसी तरह नेहरु कालोनी के अनिल बिस्वास (45) गृह प्रवेश के दूसरे दिन अपने बाथरूम में फिसलकर गिरे ऐड़ी में फ्रैक्चर हो गया।
शौक अब उन्हें तकलीफ दे रहा
बिष्ट और बिस्वास का केस तो हमने बतौर बानगी बताया है। लेकिन बाथरूम में चिकने टायल्स लगवाने का लोगों का शौक अब उन्हें तकलीफ दे रहा है। दून अस्पताल की इमरजेंसी के रोगी रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा देखें को तो महीने में औसत पांच लोग बाथरूम में फिसल कर गिरने से घायल होकर आते हैं। इसके अलावा नर्सिंगहोमों के अस्थि रोग विभाग में भी रोगी भरती हो रहे हैं।
बड़ों के साथ ही बच्चे भी आए दिन ऐसे बाथरूम में गिरा करते हैं। चिकनी टायल्स का इस्तेमाल उन घरों के बाथरूम में अधिक हुआ जो पांच से दस की अवधि में बने हैं। ज्यादातर लोगों ने बिल्डरों से मकान खरीदे थे। दून अस्पताल के वरिष्ठ अस्थि रोग विशेषज्ञ डा एसके गुप्ता का कहना है कि बड़ी उम्र के लोग फिसलकर गिरते हैं तो अक्सर कूल्हा टूटता है। जवानों के पैरों में मोच आती है। पंजे और ऐड़ी में हल्का फ्रैक्चर हो जाता है। बच्चों के फ्रैक्चर नहीं होता। उनकी मांसपेशियों में चोट आ जाती है। बहुत से फिसलने पर हाथ टेक लेते हैं तो कलाई में फ्रैक्चर हो जाता है।
यह करें
-बाथरूम में पैर जमा कर चलें
-रोशनी तेज हो
-पानी भरा न रहे
-बाथरूम इस्तेमाल करने के बाद वाइपर कर दें
-बाथरूम के फर्श पर साबुन न रखें, साबुनदानी इस्तेमाल करें
-कपड़े धोने के बाद फर्श साफ पानी से धो दें
-नहाने के बाद साबुन का पानी भरा न रहे
.बाथरूम में एंटी-स्किप टायल्स के बजाए लोग नार्मल टायल्स इस्तेमाल कर देते हैं। कुछ लोग इस पर ग्रेनाइट पॉलिश करा देते हैं, यह गलत है। दानेदार टायल्स बेहतर होती है।
-डीएस राणा आर्किटेक्ट
.दरअस्ल बाथरूम के लिए मैट फिनिश टायल्स का इस्तेमाल होता है। लेकिन इसकी फिनिशिंग ‘डल’ सी नजर आती है। फिर लोगों को अपना-अपना शौक होता है। उस चक्कर में लोग चिकनी टायल्स लगवा लेते हैं, जिससे दिक्कत हो सकती है।
-नरेश कुमार चौपड़ा, बिल्डर