रजत और अंकित टेस्ट देने लगे, जबकि हितेश कमरे पर आया। अंदर से कमरा बंद देखकर उसने रोशनदान में हाथ डालकर सिटकनी खोली। अंदर देखा तो अभिषेक खिड़की के ग्रिल पर पतली तौलिया का फंदा बनाकर फांसी पर लटका था। हितेश के शोर करने पर हॉस्टल संचालक राजेश फुलारा कमरे में आए और फिर अभिषेक को बेस अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने अभिषेक को मृत घोषित कर दिया।
सूचना पर मुखानी थानाध्यक्ष नंदन सिंह रावत मौके पर पहुंचे। उन्होंने अभिषेक के कमरे की तलाशी ली। उस समय अभिषेक के बिस्तर पर उसका एक मोबाइल और बेल्ट पड़े थे। पुलिस ने उसके दीवान से किताबें निकाली तो उनमें एक पेज का सुसाइड नोट मिला। इसमें अभिषेक ने अपने माता-पिता, चाचा और भाई को संबोधित पत्र लिखा था। पुलिस ने सुसाइड नोट को कब्जे में ले लिया।
अभिषेक ने अपने सुसाइड नोट में लिखा कि वह हिंदी मीडियम से पढ़ा था, लेकिन उसे यहां अंग्रेजी मीडियम की पढ़ाई करनी पड़ रही है। इसी कारण वह डॉक्टर नहीं बन सकता है।
विश्वास नहीं था कि अभिषेक ऐसा करेगा : फुलारा
हॉस्टल संचालक राजेश फुलारा ने बताया कि अभिषेक ने सुबह अपने सहपाठियों के साथ नाश्ता किया था। किसी को विश्वास नहीं था कि वह अचानक ऐसा कदम उठा लेगा। मौत के बाद हॉस्टल संचालक ने उसके चाचा को फोन कर घटना से अवगत कराया।
अभिषेक के साथ रहने वाले अंकित चंदोला ने बताया कि वह ज्यादा बात नहीं करता था। पूछने पर अपनी निराशा का कारण नहीं बताता था। दूसरे दोस्त रजत चौहान ने बताया कि कम नंबर आने पर उसने अभिषेक से कहा था कि हौसला रखो सब कुछ ठीक हो जाएगा।
डॉक्टर बनाना चाहते थे माता
अभिषेक के माता-पिता उसे डॉक्टर बनाना चाहते थे। इसी कारण उन्होंने घर से करीब 200 किलोमीटर दूर हल्द्वानी में अभिषेक को पढ़ाने का फैसला लिया। अभिषेक के हॉस्टल में रहने का खर्च साढ़े छह हजार रुपये प्रतिमाह और कोचिंग की सालभर की पूरी फीस 85 हजार रुपये थी। घटना की जानकारी मिलने के बाद माता-पिता और चाचा सकते में आ गए।