हिंदी सिर्फ बोलचाल की भाषा ही नहीं है, यह भारतीयों की भावनाओं का आदान प्रदान करने वाली भाषा है। यह कहना आईपीएस मणिकांत मिश्रा का, जिन्होंने 21 साल के अपने अध्ययन जीवन में कभी हिंदी का साथ नहीं छोड़ा। यही नहीं मणिकांत उन चंद गिने चुने लोगों में शामिल हैं, जिनका सामान्य पढ़ाई से लेकर प्रतियोगी परीक्षाओं में मुख्य विषय संस्कृत था।
संस्कृत को ही मुख्य विषय रखते हुए मणिकांत मिश्रा ने वर्ष 2001 में पीसीएस की परीक्षा पास की थी। मुख्य परीक्षा में उनका विषय संस्कृत ही रहा। अमर उजाला के हिंदी हैं हम अभियान के तहत बातचीत में मिश्रा बताते हैं कि उनकी कक्षा आठ तक की पढ़ाई परीषदीय स्कूलों में हुई। यहां तो उनका माध्यम हिंदी ही था। मूलरूप से बनारस के रहने वाले मणिकांत मिश्रा ने यूपी बोर्ड से वर्ष 1990 में हाईस्कूल और 1992 में इंटरमीडिएट किया था।
अब बारी स्नातक की थी तो उन्होंने यहां देववाणी संस्कृत को अपना विषय चुना। उन्होंने 1995 में संस्कृत, फिलासफी और इतिहास विषय के साथ स्नातक किया। स्नातक में भी उनका माध्यम हिंदी ही रहा। इसके बाद 1998 में फिलासफी में एमए वर्ष किया।
अभी मिश्रा की पढ़ाई की साथी हिंदी ही थी, जिसके साथ उन्होंने विधि स्नातक वर्ष 2001 में पूरी की। विधि स्नातक (एलएलबी) में भी पढ़ाई का माध्यम हिंदी को ही रखा। मिश्रा कहते हैं कि भारतीय व्यक्ति मातृभाषा में ही अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सकता है भले ही उसने सारी उम्र किसी अन्य भाषा को पढ़ा बोला हो।