स्वामी चिदानंद सरस्वती ने कहा कि जल वैज्ञानिकों की घोषणा है कि भारत के पास अभी जितना पीने योग्य जल है वर्ष 2030 तक वह आधा रह जाएगा। विश्व में सब से ज्यादा शरणार्थी जल के अभाव में होंगे। इसके लिए हम अपने गाद गदेरे, तालाब, नदियों को बचाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि ऐसी सोच विकसित करनी होगी कि ‘मेरा गांव मेरा गौरव, मेरा शहर मेरी शान’ बने।
ग्रामीण अपनी प्राथमिकताएं खुद तय करें
कार्यशाला के पहले दिन ग्राम पंचायत विकास योजना निर्माण के लिए जन योजना अभियान विषय पर चर्चा की गई। इस मौके पर पंचायती राज मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव संजय सिंह ने कहा कि ग्राम सभा की आम बैठकों में समुुदायों व ग्राम वासियों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है। ग्रामवासी अपनी आवश्यकताओं का आंकलन स्वयं करेंगे। आवश्यकताओं के अनुरूप प्राथमिकताओं का निर्धारण भी कर सकेंगे। ग्राम वासियों को योजना के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी देने से विकास का दायरा विकसित होगा।
ग्रामीणों की आवश्यकतानुसार हों योजनाएं
सेवानिवृत्त विशेष सचिव पंचायत राज मंत्रालय केे डॉ. बाला प्रसाद ने कहा कि 11वीं अनुसूची के तहत कृषि विस्तार व कृषि और बागवानी का विकास, चकबंदी और भूमि संरक्षण, लघु सिंचाई, पशुपालन दुग्ध उद्योग, कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन, लघु वन उत्पादन, कुटीर उद्योग और ग्रामोद्योग, ग्रामीण आवास, पेयजल, ईंधन व चारा भूमि, सड़कें, पुलिया व पुलों, नौका घाट, जलमार्ग और संचार के अन्य साधनों, ग्रामीण विद्युतीकरण, गैर पारंपरिक ऊर्जा श्रोत, शिक्षा प्राथमिक व माध्यमिक, तकनीकी प्रशिक्षण और व्यावसायिक शिक्षा, प्रौढ़ और अनौपचारिक शिक्षा, पुस्तकालयों और वाचनालयों की स्थापना, खेलकूद और सांस्कृतिक कार्य, चिकित्सा व स्वच्छता आदि शामिल हैं। यह सभी योजनाएं चाहे जिला योजना में हों या राज्य योजना में ग्राम वासियों की आवश्यकता के अनुसार होनी चाहिए।