प्रदेश में कुल कृषि क्षेत्र का 3.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही सिंचाई की सुविधा है। इसमें पर्वतीय क्षेत्रों में मात्र 43250 हेक्टेयर (13.11 प्रतिशत) सिंचित क्षेत्र में शामिल है। पहाड़ों में पानी होने के बावजूद भी किसानों को सिंचाई की सुविधा नहीं है। असिंचित क्षेत्र होने के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में किसानों को बारिश पर निर्भर रहना पड़ता है। सिंचाई की सुविधा के अभाव में फसलों की उत्पादकता कम है। हिमालयी राज्य ड्रिप सिंचाई योजना में ज्यादा सब्सिडी की मांग कर रहे हैं।
मैदानी और पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थिति बिल्कुल भिन्न है। पहाड़ों में खेती करने में कई तरह की चुनौतियां हैं। इसके आधार पर हिमालयी राज्यों के लिए अलग नीति बनाई जानी चाहिए। हाल ही में देश के कृषि मंत्रियों की बैठक में भी इस मुद्दे को उठाया गया था। अलग कृषि नीति बनने से पहाड़ों में किसानों को ज्यादा सुविधाएं मिल सकेगी।
-सुबोध उनियाल, कृषि मंत्री