फोटो वाले बाबा के रूप में जाने जाते स्वामी सुंदरानंद के मुताबिक, हिमालय से ही विश्व में आध्यात्मिक पर्यटन की शुरूआत हुई। हिमालय अनंत प्रेरणाओं का स्रोत है। इस प्रेरणा स्रोत से शक्ति हासिल करने के लिए परंपराओं और आध्यात्मिक चेतना में निहित दृष्टि को फिर से पाना होगा।
चुनौती नंबर छह: हिमालय को ग्रीन रोड की दरकार
लोक निर्माण विभाग से सेवानिवृत्त इंजीनियर एचके उप्रेती के मुताबिक, हिमालय में सड़क विनाश नहीं विकास का प्रतीक होनी चाहिए। सड़कें इस तरह से बने कि उनके बनने में ऊर्जा का कम से कम उपयोग हो। जल प्रबंधन से लेकर अन्य जरूरतों का ध्यान रखा जाए।
चुनौती नंबर सात: हिमालय को क्लीन टूरिज्म की दरकार
इंडियन प्रोफेशनल राफ्टर एसोसिएशन के महामंत्री मंजुल रावत के मुताबिक, अनियंत्रित पर्यटन हिमालय को नुकसान पहुंचा रहा है। राज्य गठन के बाद से अब तक प्रदेश में एक भी नया पर्यटन स्थल विकसित नहीं हुआ। पर्यटकों की संख्या बढ़ने को ही पर्यटन का विकास नहीं कह सकते। पर्यटन के बढ़ने का मतलब है कि उसमें स्थानीय भागीदारी अधिक हो।
चुनौती नंबर आठ: हिमालय खो रहा अपनी उर्वरा शक्ति
भारतीय मृदा एवं जल संरक्षण संस्थान के प्रिंसिपल साइंटिस्ट डॉ. डीवी सिंह के मुताबिक, भू क्षरण हिमालय की गंभीर समस्या है और उत्तराखंड इस समस्या से सबसे अधिक प्रभावित है। भू क्षरण जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ रहा है और जलवायु परिवर्तन को बढ़ा भी रहा है। इस समस्या से निपटने के लिए भू प्रबंधन बहुत जरूरी है।
चुनौती नंबर नौ: सुरक्षा की पुरानी पंरपरा दरकिनार, नई अपनाने को नहीं तैयार
आपदा प्रबंधन एवं न्यूनीकरण केंद्र के अधिशासी निदेशक पीयूष रौतेला के मुताबिक, हिमालय और आपदा का आपस में गहरा नाता है। आपदाओं से निपटने के लिए लोगों ने कई तरीके अपनाए थे। इन तरीकों को अपनाना होगा और सुरक्षा को हमे अपनी आदत बनाना होगा।
चुनौती नंबर दस: हिमालय की सेहत से हो रहा खिलवाड़
गति फाउंडेशन के संस्थापक डा. अनूप नौटियाल के मुताबिक, हमने हिमालय को कूड़ाघर बना दिया है। कूड़े की समस्या से निपटने के लिए सरकार, समाज और कारपोरेट को मिलकर काम करना होगा।