अलग नीति बनाने की बात हुई, लेकिन परवान नहीं चढ़ पाई योजना
इस संबंध में पर्यावरणविद सुरेश भाई का कहना है कि कई मौकों पर हिमालयी राज्यों के लिए अलग नीति बनाने की बात हुई, लेकिन यह भी परवान नहीं चढ़ पाई। इसी का परिणाम है कि आज हिमालय पर ज्यादा खतरनाक अत्याचार जारी हैं।
पूरी दुनिया पर असर डालता है हिमालय का मौसम चक्र
हिमालय का मौसम चक्र यहीं नहीं पूरी दुनिया पर अपना असर दिखाता है। पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी के अनुसार, इसका विश्लेषण दो रूप में किया जाना बहुत जरूरी है। पहला यह कि विश्वभर में प्रकृति के प्रति हमारा जो व्यवहार रहा, उससे पूरे मौसम चक्र पर सीधा प्रभाव पड़ा है। इतना ही नहीं ग्लोबल वार्मिंग ने पूरे विश्व को प्रभावित किया है।
ऐसा कोई देश नहीं बचा, जहां इसके बड़े असर नहीं दिखाई दिए हों। इसमें यह समझना बहुत जरूरी है कि पृथ्वी में दो तिहाई समुद्र है, जब भी समुद्रों का तापमान बढ़ेगा तो बड़ी हलचल की संभावना रहती है। एलनीनो या लानिना जैसे समुद्र में हुए बदलाव, कहीं सूखा और अतिवृष्टि का कारण बनते हैं। समुद्र तट पर बसे लोग और पर्वतीय क्षेत्रों में बसे लोग सीधे तौर पर इसका शिकार बनते हैं।
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दुनिया का कोई कोना ऐसा नहीं है, जहां आपदाओं ने पैर नहीं पसारे हों। इसी का एक नमूना इस साल हिमाचल प्रदेश में देखने को मिला। हिमाचल की तबाही एक बड़ा सबक है। हमें हिमालय के अनुरूप विकास की योजनाएं बनानी होंगी। खासतौर से ढांचागत विकास, क्योंकि यह सेक्टर इससे सबसे ज्यादा प्रभावित होता है। इस पर लगातार बात होनी चाहिए कि, विकास की योजना को बनाते हुए कैसे प्रकृति का ध्यान रखा जाए। कैसे संभावित आपदाओं से बचा जाए। - पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी, संस्थापक हेस्को