साल 2006 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन पुनरीक्षण के कैबिनेट के फैसले के बाद राज्य सरकार पर करीब नौ करोड़ सालाना का आर्थिक भार बढ़ेगा। इससे राज्य के करीब 43 हजार पेंशनर्स लाभान्वित होंगे। पेंशन की यह मासिक बढ़ोतरी 165 से लेकर अधिकतम 1500 रुपये तक होगी। इस राशि पर अनुमन्य महंगाई भत्ता भी मिलेगा।
इसके अलावा सेवाकाल के दौरान जिनकी मृत्यु हो जाती है, उनके परिवार को कर्मचारी के निधन की तिथि से 10 साल तक बढ़ी दर पर पारिवारिक पेंशन मिलेगी। इसमें अधिकतम आयु सीमा नहीं होगी।
राज्य कर्मचारी पेंशनर्स संगठनों की काफी समय से मांग थी कि उनको भी केंद्र सरकार के पेंशनर्स की तरह पुनरीक्षित पेंशन दी जाए। केंद्र सरकार ने 28 जनवरी, 2013 को कर्मचारी पेंशन और पारिवारिक पेंशन का पुनरीक्षण किया था। 14 जुलाई 2014 को जब यूपी सरकार ने भी केंद्र की तरह पुनरीक्षित पेंशनों की मंजूरी दे दी तो इस संबंध में उत्तराखंड के पेंशनर्स की मांग तेज हो गई।
इसको लेकर शासन में सैद्धांतिक सहमति पहले ही बन गई थी। रविवार देर रात तक हुई राज्य कैबिनेट की बैठक में इस पर मुहर लग गई। तय किया गया कि पहली जनवरी, 2006 से पहले जो कर्मचारी रिटायर हुए हैं, उनको भी केंद्र की तर्ज पर पुनरीक्षित पेंशन दी जाएगी।
बीती अवधि का एरियर भी इन पेंशनर्स को मिलेगा। इस धनराशि पर नियमानुसार 125 फीसदी का अनुमन्य महंगाई भत्ता भी मिलेगा। पुनरीक्षण में यदि किसी कर्मचारी को ज्यादा पेंशन का लाभ मिलता पाया गया तो उसकी पेंशन कम नहीं की जाएगी और न ही किसी तरह की वसूली की जाएगी। इसके अलावा अब न्यूनतम पेंशन 3500 रुपये होगी।