तार गिरते देख छोटेलाल, कमल और सुरेंद्र ने तो ट्रैक्टर से छलांग लगा दी, लेकिन ट्रैक्टर चला रहे रोहताश कूद नहीं पाए और करंट लगने से मौके पर ही उनकी मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही सैकड़ों ग्रामीण घटनास्थल पर पहुंच गए और ऊर्जा निगम के अधिकारियों पर लापरवाही बरतने का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। उनका कहना था कि विभाग के अधिकारियों को कई बार तार बदलने की शिकायत की गई है, लेकिन विभाग के कर्मचारी बिना सुविधा शुल्क के ग्रामीणों का कोई भी काम नहीं करते हैं।
पुलिस को नहीं उठाने दिया शव
घटना की सूचना पाकर रायसी चौकी प्रभारी बृजपाल सिंह पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और उन्होंने शव उठाने की कोशिश की, लेकिन गुस्साए परिजनों और ग्रामीणों ने शव नहीं उठाने दिया। ग्रामीणों का कहना था कि जब तक ऊर्जा निगम के उच्चाधिकारी मौके पर नहीं पहुंचते, शव नहीं उठाने देंगे। इसी बीच लक्सर विधायक संजय गुप्ता के प्रतिनिधि विजय कुमार भी मौके पर पहुंच गए।
बाद में दोनों पक्षों के बीच चार लाख रुपये सरकारी मुआवजा, डेढ़ लाख रुपये ऊर्जा निगम के अधिकारियों की ओर से अपने स्तर से एकत्र कर देने की सहमति पर मामले का निपटारा हुआ। इसके बाद पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। मौके पर तहसीलदार सुनैना राणा, कोतवाल वीरेंद्र सिंह नेगी, यशपाल सिंह चौहान आशीष शर्मा, डिंपल जोशी, संजय सैनी एडवोकेट, ऊर्जा निगम के एसडीओ अमीचंद, शिल्पी सैनी आदि मौजूद थे।