हाइकोर्ट ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था में सुधार के तहत बेंच, कुर्सी, पुस्तकालय, कंप्यूटर आदि की व्यवस्था के लिए सरकार को छह माह का समय दिया है। तय समय में व्यवस्था न होने पर कोर्ट ने शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, सचिव, उप सचिव, निदेशक सहित अन्य राजपत्रित अधिकारियों का जनवरी, 2018 का वेतन न देने का आदेश पारित किया है। हर तीन माह में रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने का आदेश जारी करते हुए कोर्ट ने कहा कि सरकार लग्जरी कार की खरीद मुख्य सचिव की अनुमति के बाद ही कर सकती है।
शुक्रवार को वरिष्ठ राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी दीपक राणा ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकारी स्कूलों के भवन बहुत ही खराब स्थिति में है और वहां पर बच्चे जमीन पर बैठकर पढ़ते हैं।
कोर्ट ने 19 नवंबर 2016 को सरकारी स्कूलों में बेंच, डेस्क, चॉक, डस्टर के साथ ब्लैक बोर्ड, कंप्यूटर, पुस्तकालय, छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय, माध्यमिक छात्रों को मध्याह्न भोजन उपलब्ध कराने, छात्रों के लिए दो यूनिफार्म, स्कूलों में शुद्ध पीने के पानी की व्यवस्था आदि की व्यवस्था का आदेश दिया था।
सरकार ने ये बताई थी मजबूरी
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इस आदेश का पालन न होने पर कोर्ट ने शिक्षा सचिव और वित्त सचिव को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया था। शिक्षा सचिव ने बताया था कि पूरी व्यवस्था के लिए 900 करोड़ रुपये की जरूरत है। वित्त ने इतनी धनराशि की व्यवस्था होने में असमर्थता जाहिर की थी।
इसके बाद सरकार ने कोर्ट में बताया था कि मंत्रिमंडल में इस मामले में प्रस्ताव लाया जाएगा। शुक्रवार को महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि सरकार एक साल के अंदर सरकारी स्कूलों में व्यवस्था को तैयार है। कोर्ट ने सरकार को केवल छह माह का समय सरकारी स्कूलों में बेंच, कुर्सी, कंप्यूटर, पुस्तकालय, शुद्ध पानी आदि की व्यवस्था के लिए दिया।
कोर्ट ने कहा कि निर्धारित समय अवधि में व्यवस्था न होने पर राजपत्रित अधिकारियों का जनवरी, 2018 का वेतन रोक लिया जाए। बाकी की व्यवस्था के लिए सरकार को अतिरिक्त तीन माह का समय दिया गया।
यह भी कहा कोर्ट ने
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- वे उम्मीद करते हैं कि सरकारी स्कूलों में आधारभूत संरचनाओं की व्यवस्था के लिए पब्लिक सेक्टर और धार्मिक संस्थाएं प्रदेश में सरकार की मदद के लिए आगे आएंगी।
- सरकारी स्कूलों में व्यवस्था सुधार की राह में धन की कमी को रोड़ा बनने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। हमने अप्रत्यक्ष रूप से सरकार का ध्यान संविधान के अनुच्छेद 360 की ओर भी आकृष्ट किया था। हम इसके विस्तार में नहीं जा रहे हैं, क्योंकि इसके गंभीर राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं। राज्य की सरकारी मशीनरी से यह अपेक्षा की जाती है कि वह लग्जरी सामान पर अपने अलाभकारी खर्च को कम करें और सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था के सुधार में इस पैसे को लगाए।
-प्रदेश सरकार से यह भी अपेक्षा है कि वह दिव्यांग बच्चों की सही शिक्षा के लिए विशेष शिक्षकों और विशेष उपकरणों की व्यवस्था करें।