हाईकोर्ट ने सहायक अध्यापक के 1880 पदों को भरने के लिए एक फरवरी और 24 फरवरी, 2014 को सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति में आरक्षण देने के मामले में सरकार को तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने को कहा है। साथ ही यह निर्देश भी दिया कि चयन प्रक्रिया का अंतिम परिणाम घोषित न किया जाए।
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मंगलवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। टिहरी निवासी केशवानंद झिल्डियाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि सरकार की ओर से सहायक अध्यापक के 1880 पदों को भरने के लिए एक फरवरी और 24 फरवरी 2014 को विज्ञप्ति जारी कर राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक पद के लिए आवेदन मांगे गए थे।
याचिकाकर्ता ने दिया नियमों का हवाला
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि सरकार की ओर से जारी विज्ञप्ति प्राथमिक विद्यालय अध्यापक सेवा नियमावली 2012-13 के प्रावधानों के विपरीत है।
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विज्ञप्ति में उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारियों, उनके आश्रितों और विशिष्ट खिलाड़ियों को जो आरक्षण दिया गया है वह हाईकोर्ट के आदेशों के विपरीत है। यह भी कि विज्ञप्ति में चयन प्रक्रिया टीईटी गाइड लाइन और सेवा नियमावली के भी विपरीत है।
अंतिम परिणाम घोषित न करने का आदेश
अपर महाधिवक्ता ने हाईकोर्ट को अवगत कराया कि विशिष्ट खिलाड़ियों एवं राज्य आंदोलनकारियों एवं उनके आश्रितों को आरक्षण उक्त चयन प्रक्रिया में नहीं दिया जाएगा।
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पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सरकार तीन सप्ताह में जवाब दाखिल करने के साथ ही चयन प्रक्रिया का अंतिम परिणाम घोषित न करने का निर्देश दिया है।