इसी मामले में पूर्व में हुई सुनवाई में कोर्ट ने नौ नवंबर 2016 के आदेश के बाद भी अतिक्रमण न हटाने पर नाराजगी जताते हुए शहरी विकास और आवास के प्रमुख सचिवों को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया था।
उस समय सरकार ने एक हलफनामा देकर माना था कि निगम की 551.89 एकड़ नजूल भूमि पर 14,154 लोगों ने अतिक्रमण किया हुआ है।
यह पहला मामला नहीं है जब हाईकोर्ट ने अतिक्रमण के मामले में सरकार पर तल्ख टिप्पणी की हो, इससे पहले कार्बेट पार्क से संबंधित याचिका में भी कोर्ट ने कहा था कि सरकार अतिक्रमणकारियों को बचाने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है।