फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

केदारघाटी में निकल रहे कंकालों पर HC ने निर्णय रखा सुरक्षित

Wed, 09 Nov 2016 11:48 PM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नैनीताल
विज्ञापन
केदारघाटी में कंकालों का म‌िलना जारी है। - फोटो : file photo
विज्ञापन
नैनीताल हाईकोर्ट ने जून 2013 में आई आपदा के दौरान केदारनाथ घाटी में मारे गए लोगों का अंतिम संस्कार सही तरीके से नहीं कराने और आज तक कंकाल घाटी में मिलने के मामले पर निर्णय सुरक्षित रख लिया है।
विज्ञापन


बुधवार को वरिष्ठ न्यायमूर्ति राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। दिल्ली निवासी अजय गौतम ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सरकार की ओर से पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केदारनाथ यात्रा कराई गई।

2013 में आपदा प्रबंधन सही नहीं होने से हजारों लोगों की जान चली गई। मृतकों का अंतिम संस्कार सही ढंग से नहीं हो रहा है, जिससे वातावरण प्रदूषित हो रहा है।
विज्ञापन

केदारघाटी में पड़े हैं आपदा में मारे गए लोगों के शव

घाटी में मिले नरकंकालों का अंतिम संस्कार - फोटो : file photo
याचिका में कहा कि केदारनाथ और अमरनाथ दोनों की ऊंचाई तकरीबन बराबर है। अमरनाथ यात्रियों को कई नियमों को पूरा करना पड़ता है। उनके स्वास्थ्य, आयु की जांच करने के बाद ही उनका पंजीकरण होता है।

यह भी तय होता है कि एक समय में कितने यात्री अमरनाथ जाएंगे। याची के मुताबिक ईको सेंसिटिव केदारनाथ में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। याचिकाकर्ता ने कहा कि केदारनाथ घाटी और अन्य तबाही के स्थानों पर शव पडे़ हैं।

जंगलचट्टी, रामबाड़ा आदि में मलबे के नीचे लाशें हैं। बरसात का पानी मलबे में रिसकर नदियों में जा रहा है और उसको नीचे के क्षेत्रों के लोग पी रहे हैं। ये प्रदूषण की भयावह स्थिति है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने निर्णय सुरक्षित रख लिया।
विज्ञापन

आपदा के एक अन्य मामले की सुनवाई हाईकोर्ट में दो हफ्ते बाद

नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : PTI
इसी प्रकार की एक अन्य याचिका में कहा गया था कि 2011 में महालेखाकार की ओर से दिए गए सुझावों पर भी उत्तराखंड सरकार ने ध्यान नहीं दिया।

सरकार ने हर विभाग को तीस-तीस लाख रुपये आपदा प्रबंधन से संबंधित सामान के लिए दिए थे। आरटीआई में पता चला कि 2012 में निम्न गुणवत्ता और गैर जरूरी सामान खरीदा गया।

यही कारण रहा कि 2013 में आई आपदा में उस समान से किसी को भी न तो बचाया जा सका और न ही शवों को निकाला जा सका। कोर्ट ने इस प्रकरण पर सुनवाई के लिए दो सप्ताह बाद की तिथि नियत की है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें