हाईकोर्ट ने उत्तराखंड सरकार को वह छह माह के अंदर निजी शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों के लिए एजूकेशन ट्रिब्यूनल और अपील सुनने संबंधी नियम बनाने का आदेश दिया है।
हाईकोर्ट का कहना है कि निजी संस्थानों के शैक्षणिक और गैर शैक्षणिक कर्मियों को त्वरित न्याय देने के लिए यह जरूरी है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए नौ नवंबर की तिथि नियत की।
बृहस्पतिवार को न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी पूरन प्रसाद ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर जिला न्यायाधीश देहरादून के आदेश को चुनौती देते हुए कहा था कि जिला न्यायाधीश अपीलेट अथॉरिटी के रूप में कार्य कर रहे है।
याचिका में कहा कि जिला न्यायाधीश ने याचिकाकर्ता की अपील को इस आधार पर निरस्त कर दिया कि व्यक्तिगत सेवा अनुबंध को लागू कराने का अधिकार सिविल न्यायालय को नहीं है। याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा गया कि शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों को सिविल न्यायालय में सुनवाई उपलब्ध नहीं है।
याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की ओर से न्यायालय से अनुरोध किया गया कि शैक्षणिक ट्रिब्यूनल में रिटायर्ड जज व रिटायर्ड प्रशासनिक अधिकारियों के बजाय अधिवक्ताओं को बतौर पीठासीन अधिकारी नियुक्त करने पर विचार किया जाए।
पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने राज्य सरकार को आदेशित किया कि वह छह माह के भीतर निजी शैक्षणिक संस्थानों के कर्मचारियों के लिए एजूकेशन ट्रिब्यूनल और अपील सुनने संबंधी नियम बनाए।