याची आज भी पूजा के लिए उन्हीं के पास जाते हैं। याचिका में यह भी कहा गया था कि हरकी पैड़ी में इस वर्ग के लिए एकमात्र धर्मशाला है। इसी के एक कमरे में संत रविदास की मूर्ति स्थापित कर उनका मंदिर बनाया गया है।
अर्द्ध कुंभ मेले के दौरान यहां सीढ़ियां बनाई गई थीं जो संजय पुल और संत रविदास मंदिर को जोड़ती हैं। इन सीढ़ियों के बनने पर मंदिर को बहुत नुकसान हुआ था और लोगों को मंदिर दर्शन से भी वंचित रहना पड़ा था। सरकार ने 2016 में एक आदेश पारित कर 42 लाख 17 हजार रुपये स्वीकृत किए थे ताकि इन सीढ़ियों को रविदास मंदिर से कुछ ही दूर शिफ्ट कर दिया जाए।
सरकार की ओर से कोर्ट को बताया कि संत रविदास मंदिर के सीढ़ियों के नीचे होने पर खुद भक्तगण ही आपत्ति करते थे, इसी कारण वहां से सीढ़ियों को शिफ्ट किया जा रहा है। मामले को सुनने के बाद खंडपीठ ने जिला प्रशासन हरिद्वार को निर्देश दिए कि वह मंदिर की सीढ़ियां हटाने से पूर्व नगर निगम के अलावा एससी-एसटी वर्ग के लोगों के साथ बैठक कर सुलह संधि के आधार पर निर्णय लें। कोर्ट ने हरिद्वार शहर में सरकारी जमीन और वन क्षेत्र में हुए अतिक्रमण को चार सप्ताह का नोटिस देकर हटाने और सभी सड़कों, गलियों और फुटपाथ से दो हफ्ते का नोटिस देकर अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि वीआईपी घाट के सामने चंडीघाट और चंडीपुल क्षेत्र में अवैध कब्जों को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
कोर्ट ने जिला अधिकारी हरिद्वार को निर्देश दिए कि गंगा के घाटों की साफ सफाई सुनिश्चित करें और कूड़े का निस्तारण वैज्ञानिक तरीके से करें। सुभाष घाट व तुलसी घाट पर जाल लगाकर कूड़े को नदी में जाने से रोका जाए। कोर्ट ने आयुक्त गढ़वाल को निर्देश दिए हैं कि वे उन अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करें जिनके कार्यकाल में अतिक्रमण हुआ है।
आयुक्त गढ़वाल कोर्ट में तलब
निम्न जाति के लोगों को मंदिरों में प्रवेश, पूजा करने और बतौर पुजारी नियुक्त हो सकने के अधिकार के बावजूद उनके साथ भेदभाव होने के मामले की अगली सुनवाई पर 18 जून को आयुक्त गढ़वाल को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।
छुआछूत बंद हो, समरसता बढ़े
हाईकोर्ट ने अपने निर्णय में छुआछूत के खिलाफ सख्त टिप्पणी करते हुए इसे संविधान सहित देश के ढांचे के खिलाफ बताया। कोर्ट ने कहा कि संविधान की धारा 17 द्वारा छुआछूत समाप्त की जा चुकी है और धारा 46 के तहत एससीएसटी वर्गों के लोगों के साथ सामाजिक अन्याय और उनका शोषण न होने देने की व्यवस्था की गई है। धारा 51 के तहत प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह सामाजिक समरसता बनाये रखे। कोर्ट ने फैसले में संत रविदास की लिखी कविताओं का भी जिक्र किया है।