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हाईकोर्ट: विवाह के लिए धर्म परिवर्तन रोकने को धार्मिक एक्ट बनाए प्रदेश सरकार

Mon, 20 Nov 2017 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नैनीताल
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उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को धार्मिक एक्ट बनाने के लिए आदेश दिए हैं। जिससे विवाह के लिए धर्म परिवर्तन को रोका जा सके।
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उच्च न्यायालय ने राज्य सरकार से अपेक्षा की कि वह केवल विवाह के लिए धर्म परिवर्तन के दुरुपयोग की बढ़ती प्रवृत्ति को दृष्टिगत रखते हुए मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 1968 तथा हिमाचल प्रदेश के धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम 2006 की तर्ज पर धार्मिक अधिनियम बनाये।

न्यायमूर्ति राजीव शर्मा की एकल पीठ ने सोमवार को रुद्रपुर के एक अंतर धार्मिक विवाह मामले में सुनवाई के बाद बदलते सामाजिक हालात और अंतर धार्मिक विवाह के लिए धर्म परिवर्तन के बढ़ते मामलों और इसके दुरुपयोग का हवाला देते हुए यह अपेक्षा जताई।
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रुद्रपुर जिला ऊधमसिंह नगर निवासी गिरीश कुमार शर्मा ने उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर कर कहा था कि उसकी पुत्री को विपक्षी हुसैन अंसारी उर्फ अतुल शर्मा ने शादी के बहाने छिपा रखा है।

 
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उसकी पुत्री को न्यायालय में हाजिर किया जाए। याचिका पर न्यायालय के आदेश के बाद युवती को न्यायालय में पेश किया गया। पूर्व में याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने न्यायालय को बताया था कि वह ( गिरीश शर्मा की पुत्री) दबाव में है। इसके बाद कोर्ट ने युवती को 14 नवंबर को रुद्रपुर छात्रावास भेज दिया था।

सोमवार को सुनवाई के दौरान विपक्षी आदिल हुसैन अंसारी की ओर से कहा गया कि 28 अगस्त 2017 को पुरोहित की ओर से उसका (आदिल हुसैन) धर्म परिवर्तन कराया गया है। सोमवार को युवती को कोर्ट में पेश किया गया।

उसने कोर्ट में कहा कि वह अपने माता-पिता के साथ जाना चाहती है। उच्च न्यायालय ने पुलिस को आदेशित किया है कि वह ऊधमसिंह नगर निवासी युवती को पुलिस सुरक्षा में उसके माता-पिता के घर पहुंचाये।
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