नैनीताल हाईकोर्ट ने प्रत्येक सिगरेट पर निकोटीन और टार की मात्रा न लिखे जाने के मामले में उत्तराखंड में सिगरेट की खुली ब्रिकी पर रोक लगा दी है।
उन्होंने अपने निर्णय में कहा कि यह रोक छह माह के बाद प्रभावी होगी। मुख्य न्यायाधीश बारिन घोष एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
सिगरेट में निकोटीन और टार की मात्रा लिखना जरूरी
ऋषिकेश निवासी धमेंद्र कंसल ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि सिगरेट में निकोटीन और टार की अधिकतम अनुमन्य तथा सिगरेट में उसकी दी हुई मात्रा को हर सिगरेट पर बाहर से लिखा होना चाहिए, जबकि कंपनियां डब्बों के बाहर से लिखती है।
याचिका में कहा गया कि भारत सरकार की ओर से 2003 में जारी अधिनियम के तहत प्रत्येक सिगरेट पर निकोटीन और टार की मात्रा का निर्धारण किया जाना आवश्यक है।
पूर्व में कोर्ट ने इस प्रकरण पर केंद्र और उत्तराखंड सरकार को अंतिम अवसर देते हुए अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए थे।
सिगरेट की खुली बिक्री पर रोक
पक्षों की सुनवाई के बाद पूर्व में कोर्ट ने अपना निर्णय सुरक्षित रख लिया था। मंगलवार को कोर्ट ने अपने निर्णय में उत्तराखंड में सिगरेट की खुली बिक्री पर रोक लगा दी है।
उन्होंने कहा कि एक्ट के अंदर जो चेतावनी दी गई है उसको लिखा जाना अतिआवश्यक है। अदालत ने कहा कि सिगरेट कंपनियों को यह व्यवस्था करने में समय लगेगा अत: यह रोक छह माह बाद प्रभावी होगी।