कोर्ट के इस आदेश के बावजूद याचिकाकर्ता ने कहा कि न उन्हें वेतन मिल रहा है और न ही एरियर दिया जा रहा है। कोर्ट ने निदेशक माध्यमिक शिक्षा उत्तराखंड आरके कुंवर और मुख्य शिक्षा अधिकारी रुद्रप्रयाग को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए थे। कोर्ट के संज्ञान में आया कि मुख्य शिक्षा अधिकारी रुद्रप्रयाग ने झूठा शपथ पत्र दिया है।
कोर्ट ने जब चीफ स्टैंडिंग काउंसिल को इसे स्पष्ट करने के लिए बुलाया तो उन्होंने कहा कि शपथ पत्र में कोई गलती नहीं है। दोबारा इस मामले की सुनवाई में भी चीफ स्टैंडिंग काउंसिल परेश त्रिपाठी कोर्ट में पैरवी के लिए उपस्थित नहीं हुए।
कोर्ट ने अपने आदेश में साफ कहा कि भविष्य में इस तरह की गलती दोहराई न जाए। चीफ स्टैंडिंग काउंसिल ने कोर्ट को गुमराह किया है। न्यायमूर्ति ने अपने आदेश में यह भी कहा कि चीफ स्टैंडिंग काउंसिंल उनकी कोर्ट को जानबूझकर नजरअंदाज कर रहे हैं।