उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्रियों की तरह उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्रियों को सुविधाएं दिए देने का मामला भी जनहित याचिका के जरिए हाईकोर्ट पहुंच गया है। मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति वीके बिष्ट की खंडपीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई के लिए 9 अगस्त की तिथि नियत की है।
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नारायण दत्त तिवारी
रुरल लिटिगेशन एंड एंटाइटलमेंट सेंटर देहरादून ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से पूर्व मुख्यमंत्री एनडी तिवारी, भगत सिंह कोश्यारी, विजय बहुगुणा, रमेश चंद्र पोखरियाल निशंक, भुवन चंद्र खंडूरी को जो सुविधाएं दी गई हैं, वह गलत है। इससे सरकारी धन का दुरुपयोग हो रहा है।
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- फोटो : Getty
गौरतलब है कि यूपी सरकार द्वारा पू्र्व मुख्यमंत्रियों को बंगला दिये जाने के नोटिफिकेशन जारी किया गया था। जिसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। याचिका में यूपी सरकार के नोटिफिकेशन को नियमों के विरुद्ध बताते हुए नोटिफिकेशन रद्द करने का अनुरोध किया गया था।
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बसपा सुप्रीमो मायावती
- फोटो : amar ujala
याचिका पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिफिकेशन रद्द करते हुए मायावती, मुलायम सिंह यादव और अन्य चार पूर्व मुख्यमंत्रियों को दो महीने में बंगले खाली करने को कहा है। साथ ही कोर्ट इस तरह से कब्जा जमाए सभी नेताओं को बंगला खाली करने को कहा है।
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कोश्यारी
- फोटो : अमरउजाला
ज्ञात हो कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश का असर सभी राज्यों पर भी पड़ता है। लेकिन उत्तराखंड में इसका असर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह है उत्तराखंड सरकार द्वारा बनाया गया एक एक्ट। उत्तराखंड सरकार ने एक एक्ट बनाकर पूर्व मुख्यमंत्रियों को सरकारी आवास आवंटित किये जाने की व्यवस्था की थी। हालांकि एक बार इसके खिलाफ नैनीताल हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी।
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विजय बहुगुणा
- फोटो : AmarUjala
याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को बंगला और सभी सविधायें छोड़ने के आदेश दिये थे। आदेश आने के बाद विजय बहुगुणा ने सबसे पहले बंगला और सुविधायें छोड़ने की बात कही थी। लेकिन किसी पूर्व मुख्यमंत्री ने आवास खाली नहीं किया।
इसकी वजह थी उत्तराखंड सरकार द्वारा बनाया गया एक्ट। जिसके चलते पूर्व मुख्यंमत्रियों से सुरक्षा और अन्य सुविधाएं तो वापस ले ली गईं लेकिन सरकारी आवास नहीं खाली हो पाये।