हाईकोर्ट ने केदारनाथ में आई आपदा में प्रभावित लोगों को 5 लाख रुपये देने और उनके पुनर्वास के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सरकार को चार सप्ताह में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। याचिका की सुनवाई कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश वीके बिष्ट एवं न्यायमूर्ति यूसी ध्यानी की संयुक्त खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई।
रुद्रप्रयाग निवासी अजेंद्र अजय की ओर से दायर जनहित याचिका में सरकार पर आरोप लगाया गया था कि उसने आपदा पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए कोई प्रभावी नीति नहीं बनाई। गांवों के सर्वे तक पूरे नहीं किए गए हैं।
कोर्ट के निर्देश के बाद पुनर्वास का जिन्न फिर बोतल से बाहर निकल आया है। हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार इस मुद्दे पर बुरी तरह से घिर गई है। जनहित याचिका में प्रदेश में पुनर्वास के लिए कोई स्पष्ट नीति न होने के साथ ही सरकार को हरियाणा और केंद्र की तरह स्पष्ट पुनर्वास नीति निर्माण करने का निर्देश देने की मांग की गई है।
सूचना में कई खामियां
याचिकाकर्ता केदारनाथ पुनर्वास संघर्ष समिति के अध्यक्ष अजेंद्र अजय के मुताबिक आरटीआई में पुनर्वास के संदर्भ में मांगी गई सूचना में कई खामियां नजर आईं। आपदा से प्रभावित गांवों की संख्या करीब 400 है, पर अभी तक केवल 163 गांवों का सर्वे हुआ है।
हाल यह है कि प्रदेश में एक भी प्रभावित गांव का पुनर्वास नहीं हुआ है। पुनर्वास हुआ भी है, तो कुछ परिवारों का। याचिका में राहत के मानकों पर भी सवाल उठाए गए हैं। कहा गया कि इस साल सरकार राहत को उसी जगह ले आई है, जहां जून 2013 से पहले थी। याचिका में आपदा प्रभावितों को मकान बनाकर देने सहित अन्य मुद्दों को भी उठाया गया है।