राजधानी में अवैध निर्माणों की संख्या 33 हजार के पार हो चुकी है। लेकिन, राजनीतिक दबाव में इन पर कार्रवाई की फाइलों का ढेर बढ़ता जा रहा है।
अब फाइलों का यही बोझ एमडीडीए अफसरों पर हाईकोर्ट में भारी पड़ सकता है। राजधानी में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट ने एमडीडीए से जवाब तलब किया है। सूत्रों की मानें तो इससे एमडीडीए कर्मचारियों और अफसरों में बेचैनी है।
उनके लिए पुराना रिकॉर्ड खंगालना मुश्किल हो गया है, क्योंकि राजनीतिक और प्रशासनिक दबाव में अवैध निर्माण की सैकड़ों फाइलें गायब हो चुकी हैं। कई मामले एक-दो सुनवाई के बाद दबा दिए गए। बताया जाता है कि जिस दल की सरकार होती है, वह अपने मुताबिक एमडीडीए को चलाता है।
फाइलें खुली
लंबे समय से दबी सुभाष रोड और त्यागी रोड पर हुए अवैध निर्माण की फाइलें आखिर खुल गई। गुरुवार को एमडीडीए ने 20 अवैध निर्माणों के खिलाफ नोटिस जारी कर दिए। एमडीडीए सचिव बंशीधर तिवारी ने बताया कि अन्य निर्माणों पर भी नोटिस जारी किया जाएगा। पूरे प्रकरण की सुनवाई करने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
..तो टल जाएगी कार्रवाई
सुभाष रोड पर एक कांग्रेस नेता की मौजूदगी में किए गए अवैध निर्माण के उद्घाटन के बाद खबरें छपने पर एमडीडीए ने सीलिंग का आदेश जारी किया। यह आदेश स्टे ऑर्डर के पेच में फंस सकता है।
एमडीडीए सचिव बंशीधर तिवारी ने बताया कि हाईकोर्ट के अधिवक्ता से मिली जानकारी के मुताबिक मामले में स्टे ऑर्डर की सूचना है। यह आदेश 15 दिन के लिए है। ऐसे में तय तारीख 23 अगस्त को कार्रवाई करना संभव नहीं होगा।
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