हाई बीम पर वाहन चलाने की आदत है तो अब इसे बदल डालिए। अगर ऐसा नहीं किया तो आप मुश्किल में पड़ जाएंगे।
उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने वाहनों में लगी हाई बीम लाइट को हटवाने और इन लाइटों को प्रतिबंधित करने का निर्देश सरकार को दिया है।
न्यायालय ने यह भी कहा है कि प्रदेश में मंडलों के पुलिस उपमहानिरीक्षक इस तरह की तेज रोशनी वाली लाइटों को वाहनों से हटवाने का निर्देश निचले स्तर के अधिकारियों को दें। अगर कोई हाई बीम लाइट नहीं हटाता है तो उसका चालान मोटर वाहन अधिनियम के तहत किया जाए।
तेज रोशनी से कुछ समय के लिए दिखना बंद हो जाता है
nainital high court
- फोटो : google
मुख्य न्यायाधीश केएम जोसेफ एवं न्यायमूर्ति आलोक सिंह की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। अधिवक्ता शशांक उपाध्याय ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि मोटर यान अधिनियम का उल्लंघन कर वाहनों में हाई बीम लाइटें लगाई जा रही हैं।
इस कारण सामने से आ रहे वाहन के चालक को अत्यधिक तेज रोशनी के चलते कुछ समय के लिए दिखना बंद हो जाता है। नब्बे प्रतिशत हादसे हाई बीम लाइट आंखों में पड़ने के कारण होती हैं।
राज्य सरकार और प्रशासन ने इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की है और न ही तेज रोशनी वाली लाइटों के खतरनाक प्रभाव को रोकने के लिए जागरूकता अभियान चलाया।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत होगा चालान
court
पक्षों की सुनवाई के बाद खंडपीठ ने सरकार को आदेशित किया कि वह हाई बीम लाइटों को प्रतिबंधित करे।
पुलिस उपमहानिरीक्षक कुमाऊं और गढ़वाल को हाई बीम लाइट के खतरनाक प्रभाव की जानकारी समाचार पत्रों, टीवी चैनलों आदि के माध्यम से देकर लोगों को जागरूक करने के निर्देश दिए।
उपमहानिरीक्षकों को यह भी कहा गया है कि वाहनों में हाई बीम लाइट हटाने के निर्देश अपने से निचले स्तर के अधिकारियों को दें। कोर्ट ने यह भी कहा कि यदि कोई हाई बीम लाइट नहीं हटाता है तो उसका चालान मोटर वाहन अधिनियम के तहत किया जाए।