इसके अलावा अनाजों से निर्मित प्रसाद को मंदिरों से जोड़कर स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मुहैया कराए जा रहे हैं। संस्था की ओर से ग्रामीण आधारित फल प्रसंस्करण इकाइयों का गठन एवं प्रशिक्षण, पनचक्कियों (घराट) का उच्चीकरण और उन्हें बहुउपयोगी बनाया जा रहा है।
इसके साथ ही संस्था की ओर से जलस्रोतों एवं नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए भी तमाम कार्य किए जा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि हेस्को ने पहली बार छोटे पुलों का निर्माण किया ताकि लोगों को आवाजाही में सुविधाएं मिल सके। इतना ही नहीं संस्था की ओर से सकल पर्यावरण उत्पाद (जीईपी), हिमालय दिवस, गांव बचाओ जैसे सकारात्मक आंदोलनों की भी शुरुआत की गई।
संस्था के कार्यों को देखते हुए ही आईआईपीए की चयन विशेषज्ञ समिति ने संस्था को चयनित किया गया है। संस्था पदाधिकारियों को यह पुरस्कार 26 अक्तूबर को लोक प्रशासन संस्थान नई दिल्ली में उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू की उपस्थिति में प्रदान किया जाएगा।
पुरस्कार हेस्को के साथ ही नागालैंड की एक संस्था को भी प्रदान किया जाएगा। उस संस्था ने राज्य के लोगों के बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। वहीं हेस्को के संस्थापक अध्यक्ष पद्मश्री अनिल प्रकाश जोशी ने इस के लिए चयनित होने पर इसे बड़ी उपलब्धि बताया है।