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इन गांवों के घरों में ऊंचे स्थानों पर नहीं बैठ सकते लोग, वजह पढ़कर स्तब्ध रह जाएंगे

Mon, 03 Dec 2018 09:52 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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यहां लोग अपने घर में ऊंचे स्थानों पर नहीं बैठ सकते। उत्तराखंड के सीमांत इलाकों से आ रही यह खबर आपको सोचने पर मजबूर कर देगी। नेपाल सीमा से लगे सीमांत पिथौरागढ़ जिले के कई गांवों की प्राचीन परंपराओं की ऐसी कहानी पढ़कर आप अंदर तक हिल जाएंगे। 

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यहां  दोमंजिले में चारपाई नहीं लगा सकते। गांवों के दुमंजिले में बिना चारपाई के सोना पड़ता है। घर के आंगन व अन्य स्थान पर भी ऊंचाई पर बैठने पर प्रतिबंध है। इन गांवों में आने वालों को आंगन में दीवार, चारपाई और कुर्सी पर नहीं बैठाया जाता है। इन्हें जमीन पर दरी या चटाई पर ही बैठाया जाता है।

ऊंचाई पर बैठने से 'औला' लग जाता है

यहां के लोगों का मानना है कि दुमंजिले पर चारपाई लगाने या आंगन में ऊंचाई पर बैठने से 'औला' लग जाता है। औला एक तरह का अपशकुन होता है।

इस का संबंध सीधे देवता से होता है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा का पालन न करने पर घर में अपशकुन होने की आशंका जताई जाती है।

गांव के अधिकतर युवा मानते हैं कि यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। अब इस परंपरा में बदलाव लाने चाहिए।
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अभी कुछ दिन पहले पिथौरागढ़ में सीमांत जिले के मूनाकोट विकासखंड में मासिक धर्म के दौरान बेटियों से भेदभाव की खबर के बाद अब प्रशासन नींद से जागा है। मासिक धर्म के दौरान स्कूल परिसर के पास मंदिर होने से छात्राओं को स्कूल नहीं भेजने का संज्ञान लेते हुए मुख्य विकास अधिकारी ने जांच समिति का गठन किया है। समिति के सदस्य तीन दिसंबर को सल्ला चिंगरी क्षेत्र में पहुंच मामले की जांच करेंगे।

अमर उजाला ने 27 अक्तूबर को ‘सीमांत के कुछ गांव बेटियों से कर रहे भेदभाव’ की खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था। दरअसल, अक्तूबर में नैनीताल की महिलाओं के एक जागरूक दल ने जौलजीबी से पंचेश्वर तक पदयात्रा की। अमर उजाला ने पिथौरागढ़ जिले में बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रांड एंबेसडर और मुख्य विकास अधिकारी वंदना को इसकी जानकारी दी तो उन्होंने शिक्षा विभाग के अधिकारियों से मामले की जांच कराने का भरोसा दिलाया।

अब इस मामले में उन्होंने एसडीएम एसके पांडेय की अध्यक्षता में जांच समिति गठित कर दी है। समिति में मुख्य शिक्षाधिकारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी आईसीडीएस एवं परामर्शदाता निर्भया प्रकोष्ठ को नामित किया गया है।

उन्होंने समिति के सदस्यों को निर्देश दिए कि तीन दिसंबर को राइंका सल्ला चिंगरी में तथ्यों की जांच करेंगे। इस दौरान स्थानीय नागरिकों, मंदिर समिति के सदस्यों और अभिभावकों से वार्ता कर जांच आख्या पांच दिसंबर तक उपलब्ध कराएंगे।
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