सबका साथ सबका विकास जैसे दावे यहां जुमले ही साबित हो रहे हैं। हालत ये है कि 45 फीसदी से अधिक इलाकों में रह रहे गर्भवती महिलाओं और नवजात के टीकाकरण के लिए मीलों दौड़ लगानी पड़ रही है। जानिए, कैसे सुशासन के दावों की पोल खोल रहा है ये सिस्टम...
रुद्रप्रयाग जनपद के 45 फीसदी से अधिक गांवों के ग्रामीण गर्भवती महिलाओं व नवजात के टीकाकरण को 2 से 8 किमी पैदल नापकर स्वास्थ्य केंद्रों की दौड़ लगा रहे हैं। बावजूद उन्हें समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। लेकिन विभागीय स्तर से व्यवस्था को सुधारने के कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
वर्ष 1997 में पौड़ी, चमोली और टिहरी जनपद के सीमांत क्षेत्रों को मिलाकर रुद्रप्रयाग जिले का गठन किया गया था। उम्मीद जगी थी, यहां के लोगों को स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, संचार, बिजली, रसोई गैस जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध होंगी। लेकिन जिला गठन के 19 और राज्य गठन के 16 वर्षो बाद भी तस्वीर धुंधली है।
ऊखीमठ तहसील के गौंडार, रांसी, उनियाणा, राउलेंक, तोषी, त्रियुगीनारायण, चौमासी, चिलौंड, जाल तल्ला व मल्ला, कुणजेठी, ब्यूंखी, स्यासूं, अगस्त्यमुनि ब्लाक के भुनका, थापला, खरखोटा, नैल, कोट, झुंडोली, भराड़सैंण, बणगांव, बणसू, संकरोड़ी, आरस्यूं सहित जखोली के सिलगढ़, बांगर, बड़मा, पूर्वी व पश्चिमी भरदार और फुटगढ़ पट्टी के 50 से अधिक गांवों के लिए प्राथमिक चिकित्सा तक नसीब नहीं हो पाई है।