हेमकुंड साहिब के कपाट शनिवार को दोपहर एक बजकर तीस मिनट पर विधि विधान के साथ शीतकाल के लिए बंद कर दिए गए।
इस मौके पर हेमकुंड पहुंचे दो हजार सिख श्रद्धालुओं ने पवित्र हेमकुंड सरोवर में स्नान कर हेमकुंड साहिब के दर्शन किए। हेमकुंड के समीप स्थित लक्ष्मण मंदिर के कपाट भी बंद हो गए हैं। हेमकुंड साहिब में शनिवार को दोपहर एक बजे इस साल की अंतिम अरदास पढ़ी गई।
कपाट बंद होने के बाद गुरुग्रंथ साहिब को पंच प्यारे की अगुवाई में यात्रा के प्रमुख पड़ाव घांघरिया लाया गया, जिन्हें रविवार को गोविंदघाट स्थित गुरुद्वारे में रखा जाएगा। गोविंद घाट गुरुद्वारे के वरिष्ठ प्रबंधक सरदार सेवा सिंह ने बताया कि हेमकुंड साहिब में श्रद्धा रखने वाले श्रद्धालुओं का पूरे सीजन में तांता लगा रहा।
उम्मीद है कि अगले वर्ष हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा भव्य रूप से चलेगी। इस मौके पर ट्रस्टी सरदार जनक सिंह, हेमकुंड गुरुद्वारे के प्रबंधक गुरुनाम सिंह, मुख्य ग्रंथी बाबा जत्था सिंह आदि मौजूद थे।
कब क्या हुआ
सुबह 5 बजे - गुरुग्रंथ साहिब का प्रकाश हुआ।
सुबह 8 से 10.30 बजे-सबद कीर्तन।
साढ़े 10 से 11.55 बजे तक - सुखमणि पाठ।
दोपहर 12 से 12.40 बजे तक पुन: सबद कीर्तन।
दोपहर एक बजे - अंतिम अरदास।
दोपहर एक बजकर 15 मिनट - पंच प्यारों की अगुवाई में गुरुग्रंथ साहिब को सतखंड में रखा गया।
दोपहर डेढ़ बजे - हेमकुंड साहिब के कपाट बंद।
लक्ष्मण ने शेषनाथ के रूप में की थी यहां तपस्या
जोशीमठ। हेमकुंड साहिब के समीप ही लक्ष्मण लोकपाल का मंदिर भी है। मान्यता है कि इस स्थान पर लक्ष्मण ने शेषनाग के रूप में तपस्या की थी, जो द्वापर युग में राजा दशरथ के यहां लक्ष्मण के रूप में जन्मे थे।
यहां स्थित लक्ष्मण मंदिर में भ्यूंडार गांव के ग्रामीण पूजा-अर्चना करते हैं। यहां प्रतिवर्ष मेले भी आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धालु भी हेमकुंड साहिब की तीर्थयात्रा के दौरान लक्ष्मण मंदिर में मत्था टेकना नहीं भूलते।