प्रदेश में जल्द ही हेली एंबुलेंस सेवा शुरू करने के लिए सरकार ने कवायद तेज कर दी है। इसके लिए पांच करोड़ रुपये का बजट भी जारी कर दिया गया है। इस सेवा का ट्रायल कामयाब रहने के बाद स्वास्थ्य विभाग टेंडर की प्रक्रिया शुरू करेगा। योजना के पहले चरण में हेली एंबुलेंस सेवा संचालित करने वाली एविएशन कंपनियों की ओर से डेमोस्ट्रेशन दिया जा चुका है। अब उड़ान का ट्रायल लिया जाना है। ट्रायल कामयाब रहने के बाद स्वास्थ्य विभाग टेंडर के माध्यम से कंपनी को हेली एंबुलेंस सेवा का काम देगा।
प्राकृतिक आपदा व अन्य दुर्घटनाओं में घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए प्रदेश में पहली बार हेली एंबुलेंस सेवा शुरू की जा रही है। इस सेवा के लिए राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत पांच करोड़ रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने हेली एंबुलेंस सेवा शुरू करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। इस सेवा के शुरू होने के बाद प्रदेश में कहीं भी कोई प्राकृतिक आपदा या दुर्घटना होने पर घायलों को कम समय में अस्पताल पहुंचाया जा सकेगा।
एविएशन कंपनियों की ओर से सीट के अनुसार अलग-अलग मॉडल के हेली एंबुलेंस का सरकार को डेमोस्ट्रेशन दिया गया है। अब उड़ान का ट्रायल होना बाकी है। उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थिति के अनुसार ट्रायल में हेली एंबुलेंस कामयाब रहती है तो प्रदेश के लोगों को शीघ्र ही हेली एंबुलेंस की सुविधा भी मिलेगी। उधर, सचिव नागरिक उड्डयन दिलीप जावलकर का कहना है कि हेली एंबुलेंस सेवा स्वास्थ्य विभाग से संबंधित है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से टेंडर किए जाएंगे।
हेली एंबुलेंस सेवा के लिए एनएचएम के तहत पांच करोड़ का बजट स्वीकृत है। प्रदेश में जल्द ही इस सेवा को शुरू करने के लिए एविएशन कंपनियों का ट्रायल लिया जा रहा है। ट्रायल सफल रहने के बाद ही निविदा के माध्यम से कंपनी का चयन किया जाएगा।
- नितेश झा, सचिव, स्वास्थ्य