डाकपत्थर बैराज स्थित पुल से गुजरते हुए भारी वाहन।
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भारी वाहनों की आवाजाही से यमुना वैली स्थित डाकपत्थर बैराज के हेड रेगुलेटर (एचआर) पुल पर खतरा मंडरा रहा है। पुल के एक हिस्से में दरारें तक पड़ गई हैं, दरारें लगातार बढ़ रही हैं। इससे पुल को भारी नुकसान पहुंचने की संभावना बनी हुई है, लेकिन इस ओर शासन-प्रशासन बेपरवाह बना हुआ है।
करीब 50 वर्ष की आयु पूरी कर चुके इस पुल की देखरेख की जिम्मेदारी उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड की है। पुल से भारी वाहनों की आवाजाही न हो इसके लिए निगम ने सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती की हुई है, लेकिन दिन-रात पुल से भारी वाहनों के गुजरने का सिलसिला जारी है। पुल से ही शक्ति कैनाल के लिए निर्बाध पानी की सप्लाई की जाती है, जिस पर तीन जल विद्युत परियोजनाएं कुल्हाल (30 मेगावाट), ढालीपुर (51 मेगावाट) और ढकरानी (33 मेगावाट) स्थित हैं। इनका राज्य के विद्युत उत्पादन में अहम रोल है। परियोजना क्षेत्र प्रतिबंधित है। ऐसे में यहां से किसी भी सूरत में भारी वाहनों की आवाजाही नहीं होनी चाहिए। दिलचस्प यह है कि जहां हेड रेगुलेटर पुल से भारी वाहनों की आवाजाही लगातार हो रही है, वहीं दूसरी ओर निगम ने आसन बैराज पुल पर बैरियर लगाकर भारी वाहनों की आवाजाही पर पूर्ण रोक लगाई हुई है। ऐसे में सवाल उठता है कि डाकपत्थर में यह व्यवस्था आखिर लागू क्यों नहीं हो रही है?
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कोट
इस संबंध में सरकार को सूचना दे दी गई है कि पुल को भारी वाहनों के लिए बंद कर दिया जाए। पुल से भारी वाहनों की आवाजाही से समस्या खड़ी हो सकती है। पुल पर प्रभावी ढंग से भारी वाहनों की आवाजाही को रोकने के लिए सीसीटीवी कैमरे लगाने की संस्तुति कराई जा रही है।
- विमल डबराल, जन संपर्क अधिकारी, उत्तराखंड जल विद्युत निगम