उत्तराखंड में बर्फबारी जारी है। बाबा केदारनाथ में सोमवार सुबह तक चार फुट बर्फ गिर चुकी थी। जिस कारण तापमान माइनस 8 डिग्री तक पहुंच चुका है। पानी पूरी तरह से जम चुका है। रामबाड़ा से लेकर गौरीकुंड और सोनप्रयाग में 6 इंच से लेकर 1 फुट तक बर्फ गिरने से पारा माइनस में है।
बारिश के साथ बर्फबारी होने से कड़ाके की ठंड पड़ रही है। मौसम के इस बिगड़े मिजाज से केदारनाथ में पुनर्निर्माण कार्य ठप हो गया है। निम के मीडिया प्रभारी मनोज सेमवाल ने बताया कि सोनप्रयाग से लेकर केदारनाथ तक रास्ता बर्फ से ढक चुका है।
पानी जमने से बर्फ को पिघलाकर इसका उपयोग किया जा रहा है। रविवार को भी काम नहीं हो सका था। लगातार बारिश और बर्फ गिरने से स्थिति लगातार खराब हो रही है। बता दें कि केदारनाथ धाम में निम के 340 मजदूर पुनर्निर्माण कार्य के लिए मौजूद थे। जबकि सोनप्रयाग से लेकर धाम में 35 लोगों का स्टाफ भी है।
1992 के बाद इस बार गिरी दिसंबर में इतनी बर्फ
दिसंबर माह में 2.5 से 6 इंच तक बर्फ वर्ष 1992 में देखी थी। गांवों में कई पेड़ उखड़ चुके हैं। रास्ते बंद हो गए हैं। गांवों में कई लोग तो दिसंबर माह में पहली बार ऐसी बर्फ देख रहे हैं। चारों ओर सफेद चादर बिछी है। ये शब्द हैं मक्कू निवासी सुरेशानंद सेमवाल के।
रविवार रात करीब 9 बजे से बर्फबारी शुरू हो गई थी। पाइपों में पानी जमा होने से दिक्कतें भी बढ़ गई हैं। हालांकि इन मुश्किलों के बीच लोग बर्फ का आनंद भी ले रहे हैं। तुंगनाथ क्षेत्र के मक्कू में 2.5 इंच, पाब-जगपुरा में 6 इंच, डुंड में 6 इंच, चोपता में 7 इंच तक बर्फ गिर चुकी थी। ब्लाक के दूरस्थ तोषी गांव में डेढ़ फुट बर्फ गिरने से जनजीवन प्रभावित हो चुका है।
उधर चंद्रनगर में 8 इंच तक बर्फ गिर गई है। स्थानीय निवासी डीएस रावत ने बताया कि वर्ष 1991 के बाद यह पहला मौका है जब, 20 दिसंबर से पहले बर्फ गिरी है। मोहनखाल, कनातोली, अखोड़ी, ग्वाड़, मचकंडी, भणज, कोल्ठा, किणजाणी, डुंगरी, केरा, बाडब, खालियूं क्षेत्र बर्फ से लकदक हो चुके हैं। क्षेत्र में बिजली की लाइनों को भी क्षति पहुंची है। चिरबटिया, सकलाना, जखोली, पाटा, मोलखाखाल, धारकोट, बरसूड़ी, नवासू, देवर, जाखधार, फाटा, त्रिजुगीनारायण में भी 2 से 5 इंच तक बर्फ गिरी है।
फसलों के लिए बर्फबारी वरदान
दिसंबर माह में हो रही बर्फबारी को गेहूं, मटर, सरसों, प्याज की फसल के साथ-साथ प्रकृति के लिए वरदान माना जा रहा है। वर्षों बाद यह पहला मौका है, जब इस समय जमकर बर्फ गिरी है। जमीन को पर्याप्त नमी मिल रही है। मुख्य कृषि अधिकारी विनय कुमार ने बताया कि बारिश और बर्फबारी से पाले का असर के साथ फसलों पर लगने वाले कीट का प्रकोप भी खत्म हो गया है। जड़ों तक पर्याप्त पानी मिलने से फसल उत्पादन बेहतर होने की संभावना भी बढ़ गई है।
गोपेश्वर में 21 साल बाद हुई बर्फबारी
दो दिनों से जिले में हो रही बारिश और बर्फबारी से हाड़ कंपाने वाली ठंड शुरू हो गई है। जोशीमठ में नालियों का पानी बर्फ में तब्दील हो गया है। सोमवार को जोशीमठ नगर सहित गोपेश्वर, पीपलकोटी, नंदप्रयाग, चमोली जैसे निचले क्षेत्र के बाजारों में भी जमकर बर्फबारी हुई। गोपेश्वर में वर्ष 1993 के बाद ऐसी बर्फबारी हुई है।
गोपेश्वर के अरुण तिवारी ने कहा कि घर के पास पहली बार बर्फ गिरती देखी है। 60 वर्षीय महेंद्र सिंह रावत और जयानंद तिवारी का कहना है कि वर्ष 1991 में नंदप्रयाग में दो दिनों की बर्फबारी के दौरान नंदाकिनी नदी का पानी कई जगहों पर जम गया था। वर्ष 1993 में गोपेश्वर में दो दिनों तक बर्फबारी हुई थी। यहां तब दो फीट तक बर्फ जम गई थी। इस बार भी ऐसा ही देखने को मिल रहा है।
बर्फबारी से कई सड़कें बंद
जिले के निचले क्षेत्रों में रविवार रात साढे़ नौ बजे से बर्फबारी शुरू हो गई थी, जो सोमवार सुबह दस बजे तक होती रही। बर्फबारी से गोपेश्वर का थराली-ग्वालदम, जोशीमठ-औली, पोखरी-कर्णप्रयाग, पोखरी-मोहनखाल-रुद्रप्रयाग, गोपेश्वर-मंडल-ऊखीमठ, गोपेश्वर-पोखरी मोटर मार्ग बंद हो गया है। साढे़ दस से पौने बारह बजे तक बर्फबारी थमी, तो बच्चे और युवा बर्फ में खेलने लगे। कई लोगों ने बर्फ की आकृतियां बनाईं। दोपहर बारह बजे से बर्फबारी शुरू हुई। कई बुजुर्गों ने कहा कि ऐसी बर्फबारी बुग्यालों और अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में देखने को मिलती है।
जगह-जगह अलाव की व्यवस्था
बारिश और बर्फबारी से ठिठुरन बढ़ते देख नगर पालिका जोशीमठ और गोपेश्वर ने नगरों में जगह-जगह अलाव की व्यवस्था कर राहगीरों और आवारा पशुओं को राहत दी। नगर पालिका अध्यक्ष संदीप रावत का कहना है कि चमोली और गोपेश्वर में अलाव की व्यवस्था कर दी गई है।
तापमान
जोशीमठ
अधिकतम 2 डिग्री
न्यूनतम - 3 डिग्री
गोपेश्वर
अधिकतम --3 डिग्री
न्यूनतम--1 डिग्री
बर्फबारी
बदरीनाथ --- 7 फीट
औली ---- 5 फीट
जोशीमठ - एक फीट
पोखरी - दो फीट
उर्गम घाटी - दो फीट
मंडल घाटी - दो फीट
गोपेश्वर - चार इंच
सौ गांव बर्फ की आगोश में
जिले के ऊंचाई वाले हिस्सों में हिमपात और निचली घाटियों में बारिश का सिलसिला तीसरे दिन भी जारी रहा। सोमवार सुबह गंगा घाटी के भटवाड़ी, उपला टकनौर, गाजणा, बाड़ागड्डी और यमुना घाटी में गीठ वजरी, खरसाली तथा टौंस घाटी में सांकरी, हरकीदून क्षेत्र के सौ से अधिक गांव बर्फ की आगोश में हैं। कड़ाके की ठंड के चलते लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं। निचले इलाकों में भी बारिश के साथ चल रही शीतलहर से जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। सोमवार को जिला मुख्यालय पर अधिकतम तापमान 12 डिग्री और न्यूनतम 5 डिग्री दर्ज किया गया।
सड़कों पर बर्फ ने थामे वाहनों के पहिये
गंगोत्री हाईवे पर सुक्की टॉप में करीब डेढ़ फिट बर्फ जमने से यातायात ठप हो गया। यहां से आगे हर्षिल, मुखबा तक लोगों को करीब 20 किमी दूरी पैदल नापनी पड़ रही है। जिले की आधी आबादी रवाईं घाटी को जिला मुख्यालय से जोड़ने वाला यमुनोत्री हाईवे राड़ी टॉप पर रविवार रात को अवरुद्ध हो गया था। यहां सोमवार दोपहर डेढ़ बजे यातायात चालू हो पाया। यमुनोत्री की ओर हनुमानचट्टी से आगे सड़क बंद है। सांकरी से आगे भी वाहनों की आवाजाही बर्फबारी के चलते बंद है, जबकि उत्तरकाशी-लंबगांव मोटर मार्ग पर चौरंगीखाल और पुरोला-मोरी सड़क पर जरमोला में फिसलन भरी सड़क पर जोखिम के साथ यातायात चल रहा है।
हर्षिल में स्कूल नहीं पहुंचे बच्चे
राजकीय इंटर कालेज हर्षिल के शिक्षक संजय प्रकाश शाह ने बताया कि हिमपात और कड़ाके की ठंड के चलते सोमवार को बच्चे स्कूल नहीं पहुंचे। उन्होंने बताया कि 24 दिसंबर से विद्यालय में शीतकालीन अवकाश होना है। सुक्की, झाला, जसपुर, पुराली, मुखबा, धराली आदि गांवों से करीब डेढ़ फिट बर्फ में पैदल आवाजाही भी मुश्किल हो गई है। बर्फ से ढके अन्य गांवों में भी कमोबेश यही स्थिति बनी हुई है।