बदरीनाथ में लगातार तीन दिनों से बर्फबारी होने से कड़ाके की ठंड पड़नी शुरू हो गई है। धाम में रह रहे लोग सांय ढलते ही अपने कमरों में दुबक जा रहे हैं। धाम में पिछले तीन दिनों से चटख धूप खिलने से लोगों को जहां ठंड से थोड़ी राहत मिल रही है, वहीं सांय ढलते ही धाम में चल रही बर्फीली हवाएं मंदिर समिति और तीर्थयात्रियों की दिक्कतों को बढ़ा रही हैं।
धाम में ग्रामीण और समिति के लोग ही मौजूद
बदरीनाथ धाम में अब सिर्फ बामणी गांव के ग्रामीण और मंदिर समिति के लोग ही मौजूद हैं। प्रतिदिन यहां 60 से 65 तीर्थयात्री ही मत्था टेकने पहुंच रहे हैं। धाम में बीती 7 नवंबर बारिश शुरु हुई, सांय होते-होते बर्फबारी शुरु हो गई। जिसके बाद रुक-रुककर तीन दिनों तक बर्फबारी हुई।
बदरीनाथ के धर्माधिकारी भुवन चंद्र उनियाल का कहना है कि बदरीनाथ धाम में इस वर्ष नवंबर माह के पहले सप्ताह ही बर्फबारी शुरु हो गई है। इससे पहले वर्ष 2007 में इस दौरान धाम में बर्फबारी हुई थी। उन्होंने कहा कि बदरीविशाल की पूजाएं नियमित अपने नियत समय पर संपादित हो रही हैं
एक सप्ताह से अंधेरे में बदरीशपुरी
बदरीनाथ धाम पिछले एक सप्ताह से अंधेरे में ढूबा हुआ है। धाम में मौजूद 625 किलोवाट के पावर हाउस में खराबी आ जाने से यह समस्या उत्पन्न हुई है। सांसद प्रतिनिधि विकास जुगरान ने बताया कि धाम में बिजली सप्लाई पूरी तरह से ठप पड़ी हुई है। जिससे स्थानीय लोगों के साथ ही तीर्थयात्रियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ऊर्जा निगम के ईई वीरेंद्र पंवार का कहना है कि आपदा के दौरान 11 केवी की विद्युत लाइन कई जगहों पर बह गई है। धाम में स्थित 625 केवी का पावर हाउस बीती 25 अक्तूबर को उत्तराखंड जल विद्युत निगम से उरेड़ा को हस्तांतरित हो गया है। उन्होंने कहा कि पावर हाउस को ठीक करने के लिए इंजीनियर लगे हुए हैं। शीघ्र ही धाम में विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी।