बिन्हार क्षेत्र में बुधवार को हुई भारी बारिश के बाद नदी-नाले उफान पर आ गए। क्षेत्र की प्रमुख गोहना नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया, जिससे रुद्रपुर-गोडरिया के बीच रपटे पर भारी मात्रा में पानी आने से यातायात पूरी तरह ठप हो गया। पानी के तेज बहाव से निकलने के प्रयास में दोपहिया और चारपहिया वाहन रपटे के बीच फंस गए, जिन्हें वहां मौजूद ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाला। रपटे पर पुल का निर्माण न होने से आक्रोशित ग्रामीणों ने जल्द उग्र आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
बुधवार को बिन्हार के लांघा, पसौली, मद्रसू, मटोगी, बड़वा, तौली, भूड़, सोरना, डोभरी, रुद्रपुर, होरावाला, चांदपुर और रजौली सहित आसपास के क्षेत्रों में जमकर बारिश हुई। इसके चलते गोहना नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। रुद्रपुर और गोडरिया को जोड़ने वाले रपटे के ऊपर से पानी की तेज धार बहने लगी, जिससे दोनों ओर से आवाजाही बंद हो गई। इसके बावजूद कई लोग अपनी जान जोखिम में डालकर बाइक, स्कूटर और कार से रपटा पार करने का प्रयास करते रहे। इस दौरान कई वाहन पानी के तेज वेग में फंसे, जिन्हें ग्रामीणों ने समय रहते बाहर खींच लिया।
हर साल बरसात में बनती है जानलेवा स्थिति
सहसपुर विधायक के प्रतिनिधि डॉ. नरेंद्र सिंह तोमर, स्थानीय निवासी बाबूराम कटारिया, भगत सिंह, राजेंद्र सुयाल, चंद्रपाल सुयाल, विमल तोमर, मोहन सिंह चौहान और मुकंदीलाल सुयाल ने बताया कि हर साल बरसात में गोहना नदी का रपटा जानलेवा बन जाता है। पहले भी कई बार वाहन रपटा पार करते समय पानी में बह चुके हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे लंबे समय से रपटे के स्थान पर पुल निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। यदि जल्द निर्माण प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो ग्रामीण सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे।
पछवादून में नदियां सामान्य, बिजली उत्पादन निर्बाध
बिन्हार क्षेत्र के विपरीत पछवादून के मैदानी और निचले इलाकों में बुधवार को बारिश नहीं हुई। इससे प्रमुख नदियों का जलस्तर सामान्य बना रहा और जलविद्युत परियोजनाओं में बिजली उत्पादन प्रभावित नहीं हुआ। यूजेवीएनएल के जनसंपर्क अधिकारी विमल डबराल ने बताया कि व्यासी परियोजना में 120, छिबरो में 200, खोदरी में 89, ढकरानी में 34, ढालीपुर में 51 और कुल्हाल में 30 मेगावाट बिजली का उत्पादन रिकॉर्ड किया गया है।