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गढ़वाल के गांवों में कहर बनकर टूटी बारिश, मकान और खेत बहे

Wed, 22 Jun 2016 09:24 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, गोपेश्वर
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heavy rain destroyed houses and fields - फोटो : amar ujala
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गढ़वाल में गोपेश्वर के घाट ब्लॉक के माणखी, जाखणी, चोपड़ाकोट, चरी और कांडई गांवों में बारिश कहर बनकर टूटी।
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जाखणी गांव में रोड़ा नाले की गर्जना से सहमे गांव के 40 परिवारों ने देर शाम ही मंदिर में शरण ले ली थी। दहशत के मारे यह परिवार मंगलवार को भी मंदिर में ही डटे रहे। गांवों में मकानों और खेती को बड़ा नुकसान पहुंचा है।

सोमवार शाम ढाई घंटे की बारिश में ग्रामीण धीरज सिंह की गोशाला और उसमें बंधे पांच मवेशी नाले के तेज बहाव में बह गए। ग्रामीण लखपत सिंह का मकान कटाव होने से खतरे की जद में आ गया है।
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रोड़ा गदेरे के मलबे से हिम ऊर्जा की जल विद्युत परियोजना ठप पड़ गई। माणखी गांव में भी बरसाती गदेरा उफनाने से गांव के 70 परिवारों ने प्राथमिक विद्यालय में शरण लेने की तैयारी कर दी थी।

बरसाती नाले के कटाव से मकान रहने लायक नहीं

heavy rain destroyed houses and fields
माणखी के ग्राम प्रधान राकेश सती का कहना है कि ग्रामीणों ने अपने घरों से जरूरी सामान, जेवरात और बच्चों के स्कूल बैग भी विद्यालय तक पहुंचा दिए थे, लेकिन रात साढ़े सात बजे बारिश धीमी पड़ी तो ग्रामीणों ने राहत की सांस ली।

शाम साढ़े पांच बजे से शुरू हुई बारिश रात आठ बजे पूरी तरह थम गई। चरी गांव में रणजीत सिंह और जगदीश सिंह के मकान बरसाती नाले के कटाव से रहने लायक नहीं रह गए हैं।

चोपड़ाकोट गांव में करीब दो सौ नाली कृषि भूमि मलबे में दफन हो गई है। माणखी गांव के दस मकानों में दरारें आ गई हैं। माणखी, जाखणी और चरी गांवों में चार पैदल पुलिया बह गई हैं। कांडई-माणखी (13 किमी) सड़क मलबा आने से अवरुद्ध हो गई थी, मंगलवार को यहां आवाजाही सुचारु हो गई।

जिला पंचायत सदस्य लक्ष्मी जोशी का कहना है कि घाट क्षेत्र में बाढ़ सुरक्षा कार्यों में भी कोताही बरती गई है। जिलाधिकारी विनोद कुमार सुमन ने कहा कि क्षतिग्रस्त पुलियाओं के  निर्माण और क्षेत्र में राशन की आपूर्ति सुनिश्चित करवाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।

भारी बरसात से तीन सड़कें बाधित, नदियां उफान पर

heavy rain destroyed houses and fields
कोटद्वार में तीन दिनों से लगातार हो रही बारिश से दुगड्डा और यमकेश्वर क्षेत्र की तीन सड़कें बाधित हो गई हैं। भारी बारिश के चलते मंगलवार के भाबर क्षेत्र के नदी-नाले उफान पर रहे। बारिश से काश्तकारों के चेहरे खिले हुए हैं।

काश्तकार धान की फसल की तैयारियों में जुट गए हैं। किसानों का कहना है कि बारिश अच्छी रही तो धान की फसल बढ़िया होने की उम्मीद है। पर्वतीय क्षेत्र में भारी बारिश से भाबर की नदियां मालन, खोह और सुखरौ उफान पर रही। प्रशासन ने बरसात के सीजन को देखते हुए नदी तट के लोगों को सतर्क किया है।

मंगलवार सुबह भारी बारिश से दुगड्डा लोनिवि खंड की तीन सड़कें भृगुखाल-थनूड़ मोटर मार्ग, दूणी-मांडई और पौखाल-कण्वाश्रम मोटर मार्ग पर जगह-जगह मलबा आबय्या।त पहाड़ी दरकने के चलते सड़कों पर आवागमन ठप हो गया। लोगों को मीलों पैदल चलकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ा।
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पर्वतीय क्षेत्र के कई गांवों के लिए दुश्वारियां बढ़ी

heavy rain destroyed houses and fields
लोनिवि के अधिशासी अभियंता राजेश चंद्रा ने बताया कि सड़क बंद होने की खबर मिलते ही जेसीबी भेज दी गई हैं। बारिश न हुई तो तीनों सड़कें बुधवार तक यातायात के लिए खोल दी जाएंगी।

भारी बारिश ने जहां पर्वतीय क्षेत्र के कई गांवों के लिए दुश्वारियां बढ़ा दी हैं, वहीं भाबर के इलाके के किसानों के चेहरे खिले हुए हैं।

किसान बीरेंद्र केष्टवाल, नत्थी प्रसाद, रमेश बिंजोला और केशर सिंह नेगी का कहना है कि इस बार मानसून सही समय से सक्रिय हो गया। पूरे सीजन अच्छी बारिश की उम्मीद है, इसका असर धान की फसल पर भी पड़ेगा।
 
मालन, खोह और सुखरौ नदियों में जलस्तर बढ़ने से तहसील प्रशासन ने नदी के किनारे की बस्तियों को अलर्ट किया है। कहा कि पर्वतीय क्षेत्र में निरंतर हो रही बारिश से जलस्तर अचानक बढ़ने की आशंका है।

Published By : Nirmala Suyal
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