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देहरादून में देर शाम बारिश के साथ हुई ओलावृष्टि, बादल की गड़गड़ाहट ने बढ़ा दी धड़कनें

Sat, 28 Apr 2018 09:07 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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rain in dehradun
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राजधानी देहरादून में शनिवार को देर शाम ओलों के साथ तेज बौछारें पड़ी। इसके साथ ही बादलों की तेज गड़गड़हाटट ने लोगों के दिलों की धड़कन बढ़ा दी। देर शाम करीब साढ़े सात बजे एक दम से तेज बारिश और ओलावृष्टि हुई। वहीं शनिवार को केदारनाथ में भी बारिश हुई। 
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वहीं मौसम विभाग ने राजधानी देहरादून समेत प्रदेश के लगभग सभी हिस्सों में बारिश का अनुमान लगाया था। जबकि, छह जिलों में तेज बारिश के साथ अंधड़ चलने और ओले गिरने की संभावना जताई थी। शनिवार को पिथौरागढ़ में भी ओलावृष्टि के साथ बारिश हुई, जिससे वहां ठंड बढ़ गई। ठंड से बचने के लिए लोगों ने गर्म कपड़ों का सहारा लिया।

शनिवार को बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब की चोटियों पर बर्फबारी हुई। फूलों की घाटी, रुद्रनाथ, लाल माटी सहित ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी बर्फबारी हुई, जबकि जिले के निचले क्षेत्रों में बारिश हुई। मौसम में आए बदलाव से बदरीनाथ धाम में ठंड बढ़ गई है। शाम साढ़े पांच बजे से छह बजे तक धाम में तेज हवाएं भी चलीं। देर शाम तक धाम में कोहरा छाया रहा।
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केदारनाथ धाम में हुई बारिश

kedarnath temple
दोपहर बाद से गौरीकुंड से लेकर केदारनाथ में हल्की बारिश हो रही है। यहां चारों ओर कोहरा छाया हुआ है। खराब मौसम के चलते धाम व यात्रा पड़ावों पर ठंड बढ़ गई है। जिससे अन्य प्रांतों से यहां पहुंचे यात्रियों को दिक्कतें हो रही है। इधर, जिला मुख्यालय में सुबह से ही हल्के बादल छाए रहे।

करीब छह बजे बाद मुख्यालय में भी जोरदार बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई। भारी बारिश से रुद्रप्रयाग-गौरीकुंड हाईवे पर गंगानगर में पहाड़ी से मलबा आने के चलते अवरुद्ध हो गया। कड़ी मशक्कत करने के एक घंटे बाद हाईवे को वाहनों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया। जबकि अगस्त्यमुनि, चंद्रापुरी, भीरी में भी जमकर ओलावृष्टि हुई। जबकि गुप्तकाशी समेत केदारघाटी के कई हिस्सों में बारिश हुई।

यात्रा पड़ावों पर खोली कैंटीन  
पड़ावों पर जंगल चट्टी, भीमबली, और लिनचौली में श्रद्धालुओं के चाय, नाश्ता व भोजन के लिए गढ़वाल मंडल विकास निगम ने अपनी कैंटीन खोली है। वहीं, केदारघाटी व जनपद के कई गांवों से पहुंचे लोगों ने भी अपनी दुकानें स्थापित की है। भीमबली में सत्तर, लिनचौली में 686 व केदारनाथ में 5000 से अधिक श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था की गई है।  
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