दोनों मंडलायुक्त, सचिव वन एवं पर्यावरण व अन्य कोर्ट हुए पेश, अगली सुनवाई फरवरी में
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि हम इस प्रदेश को साफ सुथरा देखना चाहते है इसलिए समाज को जागरूक करना जरूरी है। कोर्ट ने कुमाऊं और गढ़वाल के मंडलायुक्तों को निर्देश दिए कि पूर्व के आदेशों का पालन करते हुए सभी जगहों में सॉलिड वेस्ट फैसिलिटी का संचालन करना सुनिश्चित करें।
सुनवाई के दौरान कमिश्नर कुमाऊं दीपक रावत, कमिश्नर गढ़वाल, सचिव वन एवं पर्यावरण व मेंबर सेकेट्री पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड व्यक्तिगत रूप से पेश हुए। कमिश्नर कुमाऊं ने कोर्ट को अवगत कराया कि कुमाऊं में 782 वेस्ट स्पॉट है, जिनमें से 500 जगहों को साफ कर दिया गया है। कूड़ा निस्तारण के लिए मंडल के जिला अधिकारियों व उपजिला अधिकारियों को आदेश दिए गए हैं। इस मामले में अधिकारियों ने मंडल में 3101 दौरे भी किए हैं। कमिश्नर गढ़वाल ने अवगत कराया कि रुद्रपयाग व चमोली को छोड़कर मंडल के अन्य जिलों में कूड़े का निस्तारण कर दिया गया है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए फरवरी के दूसरे सप्ताह की तिथि नियत की है।
अल्मोड़ा निवासी जितेंद्र ने दायर की है याचिका
अल्मोड़ा हवलबाग निवासी जितेंद्र यादव ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने 2013 में बने प्लास्टिक यूज व उसके निस्तारण के लिए नियमावली बनाई थी। पर इनका पालन नहीं किया जा रहा है। 2018 में केंद्र सरकार ने प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम बनाए थे। इसमें उत्पादनकर्ता, परिवहनकर्ता और विक्रेताओं को जिम्मेदारी दी गई थी कि वे जितना प्लास्टिक निर्मित माल बेचेंगे उतना ही खाली प्लास्टिक वापस ले जाएंगे। अगर नहीं ले जाते हैं तो संबंधित नगर निगम, नगर पालिका व अन्य को फंड देंगे ताकि वे इसका निस्तारण कर सकें लेकिन उत्तराखंड में इसका उल्लंघन हो रहा है।