- इसी माह से घर पर प्रसव को शून्य करने के सख्त निर्देश, अति दुर्गम क्षेत्रों में हेली सेवाओं से मातृत्व सुरक्षित
अमर उजाला ब्यूरो
देहरादून। स्वास्थ्य सचिव सचिन कुर्वे ने प्रदेश में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को कम करने के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी को और सख्त करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंनेकहा, गर्भवती की घर पर प्रसव स्वीकार्य नहीं होगा। इसी माह से घर पर प्रसव को शून्य करने के निर्देश दिए।
बृहस्पतिवार को सचिव स्वास्थ्य ने देहरादून व चंपावत जिलों की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। बैठक में दोनों जिलों की एएनएम ने वर्जुअल माध्यम से जुड़कर जमीनी चुनौतियों व प्रगति से अवगत कराया। सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि स्वास्थ्य योजनाओं के क्रियान्वयन में ठोस परिणाम दिखाई देने चाहिए। अप्रैल माह से राज्य में किसी भी स्तर पर घर प्रसव स्वीकार्य नहीं होगी और प्रत्येक गर्भवती महिला तक समय पर गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना सभी स्वास्थ्य कर्मियों की जिम्मेदारी है। प्रत्येक गर्भवती की अपेक्षित प्रसव तिथि के आधार पर माइक्रो ट्रैकिंग अनिवार्य रूप से की जाए। इसके अलावा चिन्हित होम डिलीवरी क्षेत्रों में मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को स्वयं स्थलीय निरीक्षण कर समाधान की कार्रवाई करें।
बैठक में पर्वतीय और दूरस्थ क्षेत्रों में गर्भवती महिलाओं के सुरक्षित परिवहन की चुनौती पर विशेष चर्चा की गई। दुर्गम क्षेत्रों में समय से पूर्व योजना बनाकर गर्भवती महिलाओं को संस्थागत प्रसव के लिए सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराया जाए। बैठक में निदेशक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ. रश्मि पंत, सहायक निदेशक डॉ. अमलेश, सहायक निदेशक डॉ. उमा रावत, सहायक निदेशक डॉ. अजय नागरकर, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. दिवेश चौहान, डॉ. मनोज शर्मा वरिष्ठ परामर्शदाता डॉ. नितिन अरोड़ा समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
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टीबी उन्मूलन अभियान को भी गति
टीबी उन्मूलन कार्यक्रम में विशेष अभियान के तहत उच्च जोखिम क्षेत्रों को प्राथमिकता के आधार पर जांच की जाए। आयुष्मान आरोग्य स्वास्थ्य शिविरों में अधिकतम टीबी स्क्रीनिंग सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही सभी चिकित्सालयों की कुल ओपीडी का न्यूनतम 10 प्रतिशत टीबी स्क्रीनिंग के लिए रेफर करने के निर्देश दिए।