प्रगति से प्रकृति पथ तक साइकिल यात्रा के पांचवें दिन पर्यावरणविद् पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने छात्रों में प्रकृति को बचाने की अलख जगाई। नासिक के पंचवटी में कॉलेज के छात्र-छात्राओं से संवाद में उन्होंने कहा कि पश्चिमी देशों के विकास मॉडल से प्रकृति को नुकसान हो रहा है। इससे हमें सबक लेना होगा।
महात्मा गांधी विद्या मंदिर फार्मेसी कॉलेज और लोकनेते वेंकटराव हीरे महाविद्यालय पंचवटी में संवाद के दौरान डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि प्रकृति का पहला सबक यही है कि आप जहां पैदा हुए आप उसकी भाषा, वेशभूषा, रहन-सहन का सम्मान करें। हम अपनी भाषा को बोलने में झिझकते हैं और अंग्रेजी भाषा बोलने वाले को ज्यादा महत्व देते हैं। अपने खानपान को छोड़ अन्य क्षेत्रों के खानपान को अपनाते हैं। हम यह भूल गए कि प्रकृति ने हमें जिस जगह पैदा किया है, हमें उसी तरह के व्यवहार रखने चाहिए।
डॉ. जोशी ने कहा कि हम भगवान की पूजा करते है। दूसरी तरफ प्रकृति के संसाधनों का अंधाधुंध दोहन करते है। प्रकृति को नजर अंदाज कर गंगा, यमुना नदी के हालात बदल दिए हैं। प्रकृति को लेकर आज हमारा दोहरा चरित्र है। हम अपने घरों को साफ करते हैं, लेकिन हमारी नदियां दूषित हो गई हैं। उन्होंने कहा कि प्रगति के साथ हमें प्रकृति के मूल्यों को नहीं भूलना चाहिए। पश्चिमी देशों का मॉडल अपनाते हैं, लेकिन आज उन देशों के हालात भी ठीक नहीं हैं। 60 प्रतिशत यूरोप सूखे की कगार पर है। इस मौके पर डॉ. अपूर्व हीरे, डॉ. प्रशांत हीरे, डॉ. हरीश आड़के, राजेश शिंदे आदि मौजूद रहे।