केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत ने एक बार फिर उत्तराखंड सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
चिट्ठी भेजकर रोष जाहिर किया
रावत ने गन्ना मूल्य की बाबत मुख्यमंत्री को एक कड़ी चिट्ठी भेजकर रोष जाहिर किया है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जो मूल्य सरकार ने तय किया है, चीनी मिल उससे भी कम दे रहे हैं। इसलिए सरकार किसानों के साथ न्याय करे।
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गन्ना किसानों के बहाने की सही लेकिन एक अरसे बाद केंद्रीय मंत्री हरीश रावत व सरकार के बीच खतोकिताबत का दौर शुरू हो गया है।
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विगत 31 दिसम्बर को मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को भेजी चिट्ठी में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री हरीश रावत ने कहा कि सरकार ने 285 रुपए प्रति क्विंटल केहिसाब से गन्ना मूल्य निर्धारित किया था, लेकिन किसानों को चीनी मिले 260-265 रुपए की दर से गन्ना क्रय कर रही है।
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रावत ने चिट्ठी में लिखा कि किसानों ने उन्हें बताया कि चीनी मिलों का कहना है, बैलेंस राशि का भुगतान बाद में किया जाएगा। रावत ने कहा कि यह ठीक नहीं है और लाखों गन्ना किसान इस समय निराश हैं।
नाराजगी का आलम
पिछले पेराई सत्र का ही करोड़ों रुपए गन्ना मूल्य भुगतान के रूप में चीनी मिलों पर बकाया है और इस बार भी स्थिति किसान के पक्ष में नजर नहीं आ रही है। पेराई सत्र देर से शुरू होने से वैसे ही नुकसान हो चुका है और अब मूल्य भी पूरा नहीं मिलने से नाराजगी का आलम है।
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इससे सरकार की छवि पर भी प्रभाव पड़ रहा है। इसलिए इस विषय में शीघ्र ही उचित कदम उठाया जाए।