मुख्यमंत्री ने हड़ताली कर्मियों को तल्ख शब्दों में कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि हरीश रावत को ऊंची आवाज से नहीं डराया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राज्य केवल मैदानी क्षेत्र के तीन जिलों के विकास के लिए नहीं बना है। सभी तेरह जिलों का समान रूप से विकास करना होगा। इसके लिए कर्मचारियों को पूर्ण मनोयोग से काम करना होगा।
कर्मचारियों को कम से कम दो साल तक हड़ताल का रास्ता त्यागना होगा। सरकार वाजिब मांगों को अवश्य पूरा करेगी। कहा कि उपनल कर्मियों की मांगें मान ली गई हैं।
दुर्गम क्षेत्रों में करनी होगी नौकरी
आपदाग्रस्त स्कूलों में 30 पर एक शिक्षक के प्रावधान में बदलाव लाकर 20 पर एक शिक्षक तैनात करने का निर्णय लिया गया है। नई नियुक्ति वालों को दुर्गम में भी काम करना होगा। जो नई नियुक्ति वाला कर्मी समय पर ज्वाइन नहीं करेगा, उसकी नियुक्ति को रद्द कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि राज्य बनने के 14 सालों में बहुत सारे काम हुए हैं। तकनीक का इस्तेमाल करने के लिए सारे तरीकों का इस्तेमाल करूंगा, सरकार महिला, युवा, बुजुर्ग नीति बना रही है, जिसके परिणाम शीघ्र दिखाई देंगे।
बेरोजगार प्रशिक्षितों को भी दिया संदेश
उन्होंने तल्ख शब्दों में कहा कि देहरादून में जिंदाबाद, मुर्दाबाद के स्थान पर सरकार को काम करने दें तो समस्याएं स्वत: ही हल होंगी। बेरोजगार प्रशिक्षितों की नियुक्ति के लिए भी सरकार प्राथमिकता से काम कर रही है।