स्थापना दिवस पर उत्तराखंड प्रगति के पथ पर पुस्तक के लोकार्पण समारोह में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने स्वीकार किया कि पहाड़ और मैदान के बीच असमानता की खाई को 14 साल बाद भी नहीं पाटा जा सका है।
पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सामने कई चुनौतियां हैं। सरकार सबके विकास के लिए काम कर रही है। सरकार जो कर रही है धरातल पर उसका परिणाम करीब डेढ़ साल में देखने को मिल जाएगा।
बीजापुर स्थित मुख्यमंत्री आवास में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि पहाड़ और मैदान के बीच विषमता बढ़ी है। मैदानी क्षेत्रों की तुलना में पर्वतीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं लोगों को नहीं मिल पाई।
शिक्षा सहित जीवन स्तर में भी पर्वतीय क्षेत्रों में गिरावट नजर आ रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की कोशिश समावेशी विकास की है।
ऐसे विकास की जिसमें सबकी भागीदारी हो। राज्य गठन के बाद प्रदेश की कई उपलब्धियां रही हैं। प्रति व्यक्ति आय में और विकास दर प्रदेश नए राज्यों में सबसे आगे रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2025 का लक्ष्य सामने रखते हुए राज्य स्थापना दिवस पर सभी को उन्नत उत्तराखंड बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय, केबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, दिनेश अग्रवाल, दिनेश धनै, हरिशचंद्र दुर्गापाल, विधायक ललित फर्सवाण, हेमेश खर्कवाल, राज्य आंदोलनकारी सम्मान परिषद के अध्यक्ष धीरेंद्र प्रताप, पूर्व सांसद टीपीएस रावत, मुख्य सचिव एन रविशंकर सहित अन्य कई उपस्थित थे।
सूचना सचिव मोहम्मद शाहिद ने अतिथियों का स्वागत और महानिदेशक रविनाथ रमन ने धन्यवाद ज्ञापित किया। अपर निदेशक सूचना डा. अनिल चंदोला ने संचालन किया।
ग्रीष्मकालीन राजधानी होगी गैरसैंण!
स्थापना दिवस पर एक बार फिर से राजधानी का मुद्दा गरमा गया। पुस्तक का विमोचन करने के बाद मीडिया से मुखातिब मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि गैरसैंण को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाए जाने की पूरी कोशिश की जा रही है। जल्द ही इस मामले को कैबिनेट में रखकर सभी मंत्रियों की राय भी ली जाएगी।