फुटबॉल के मैदान में ‘आयरन वॉल ऑफ इंडिया’ के तौर पर जाने जाने वाले पूर्व अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी त्रिलोक सिंह बसेड़ा को उत्तराखंड स्थापना दिवस पर मरणोपरांत उत्तराखंड खेल रत्न अवार्ड से नवाजा गया।
इन्हें मिली उत्तराखंड खेल रत्न सम्मान
नम आंखों से उनकी पत्नी राधिका बसेड़ा ने यह सम्मान लिया। अर्जुन अवॉर्डी पूर्व अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी हरिदत्त कापड़ी को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और निशानेबाजी कोच नारायण सिंह राणा को देवभूमि उत्तराखंड द्रोणाचार्य पुरस्कार दिया गया।
उत्तराखंड राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर रविवार को मुख्यमंत्री आवास में खेल विभाग की ओर से सम्मान समारोह आयोजित किया गया। निदेशक शैलेश बगोली ने त्रिलोक सिंह बसेड़ा, हरिदत्त कापड़ी और नारायण सिंह राणा की उपलब्धियों के बारे में बताया।
इसके बाद सबसे पहले पूर्व अंतरराष्ट्रीय फुटबॉल खिलाड़ी त्रिलोक सिंह बसेड़ा को उत्तराखंड खेल रत्न सम्मान दिया गया। स्व. बसेड़ा की पत्नी राधिका बसेड़ा को मुख्यमंत्री हरीश रावत और खेल मंत्री दिनेश अग्रवाल ने ताम्रपत्र, ब्लेजर और पांच लाख रुपये का चेक सौंप सम्मानित किया।
इसके बाद बाद निशानेबाजी कोच नारायण सिंह राणा को देवभूमि उत्तराखंड द्रोणाचार्य अवॉर्ड के तहत ब्लेजर, ताम्रपत्र और तीन लाख रुपए का चेक मुख्यमंत्री और खेल मंत्री ने दिया। पूर्व अंतरराष्ट्रीय बास्केटबॉल खिलाड़ी और अर्जुन अवार्डी हरिदत्त कापड़ी को लाइफटाइम अचीमेंट अवार्ड के तहत ब्लेजर, ताम्रपत्र और पांच लाख रुपए का चेक देकर सम्मानित किया गया।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री यशपाल आर्य, दिनेश धनै, हरीश चंद्र दुर्गापाल, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
पत्र पढ़ भावुक हुए सीएम
सम्मान समारोह में संबोधन के दौरान सीएम हरीश रावत उत्तराखंड खेल रत्न त्रिलोक सिंह बसेड़ा की पत्नी राधिका बसेड़ा का पत्र पढ़ते हुए भावुक हो गए। उन्होंने पत्र पढ़कर सुनाया, ‘मैं 78 साल की एक वृद्ध महिला हूं और जीवन की संध्या में खड़ी हूं।
उनकी मृत्यु के इतने वर्षों बाद भी उन्हें और उनके कारण मुझे जो मान और सम्मान प्राप्त हो रहा है, इसके लिए आपका धन्यवाद।
मुझे पूरी उम्मीद, विश्वास और भरोसा है कि उनकी आत्मा जहां कहीं भी होगी, जिस योनि जिस रूप में भी होगी, आपके द्वारा दिए गए मान व सम्मान को पाकर प्रसन्नचित होगी। आपके द्वारा भेंट किए स्मृतिचिन्हों को मैं जीवनपर्यंत अपने पास रखूंगी, अपने पूरे ईमान से, शान से और मोहब्बत से।’ सीएम ने कहा कि यह उत्तराखंड की मातृशक्ति के संघर्ष और जीवटता का परिचायक है।
गांव में बने फुटबॉल मैदान
‘उत्तराखंड की भूमि और भूमिपुत्रों पर मुझे पूरा विश्वास है। उन्हें उचित प्रोत्साहन मिले तो प्रदेश में एक नहीं कई त्रिलोक सिंह बसेड़ा पैदा होंगे जो रहती दुनिया तक राज्य और देश का नाम रोशन कर देवभूमि को गौरवान्वित करेंगे।’
पति का सम्मान लेने के बाद राधिका बसेड़ा ने प्रदेश में खेल-खिलाड़ियों की स्थिति में सुधार की ख्वाहिश इस तरह सीएम हरीश रावत के समक्ष रखी। उन्होंने अपने गांव (भंडारी गांव, देवल थल, पिथौरागढ़) में फुटबाल मैदान बनाने और गांव के इंटर कॉलेज का नाम त्रिलोक सिंह बसेड़ा के नाम पर रखने का अनुरोध भी किया।
सीएम आवास में आयोजित समारोह में मंच से जैसे ही त्रिलोक सिंह बसेड़ा को उत्तराखंड खेल रत्न दिए जाने की बात कही गई, राधिका भावुक हो गईं। उनकी आंखों से आंसू झरने लगे। किसी तरह उन्होंने खुद को संभाला, मंच तक पहुंचीं और सम्मान लिया।
लेकिन आंखों में नमी बरकरार रही। उन्होंने गांव के लिए मैदान मांगा तो सीएम ने जरूरी कार्रवाई का भरोसा दिलाया। बाद में अमर उजाला से बातचीत में राधिका ने कहा कि आज यह सम्मान मिला है तो लोग जान रहे हैं कि त्रिलोक सिंह बसेड़ा कौन, क्या थे।
बताया कि जब वह खेलते थे, बेटों का जन्म भी नहीं हुआ था। बच्चों को भी आज पता चला कि पिता क्या करते थे, उनका कैसा रुतबा था। अब बस गांव में बच्चों के लिए फुटबॉल मैदान बन जाए और राजकीय इंटर कॉलेज देवलथल का नाम त्रिलोक सिंह बसेड़ा के नाम पर हो जाए तो बहुत सुकून मिलेगा।
राधिका के बेटे भूपेंद्र बसेड़ा, हेमंत बसेड़ा, बहू स्मिता, पौत्री लावण्या, बेटी पुष्पा और दामाद हरीश रावत भी उनके साथ मौजूद रहे।
आज हमने राज्य के महान खिलाड़ी त्रिलोक सिंह बसेड़ा को सम्मानित किया है। यह हमारे लिए गर्व की बात है। उनके गांव में फुटबॉल मैदान बनाने संबंधी मांग पर भी विचार होगा।
- दिनेश अग्रवाल, खेल मंत्री