पूर्व सीएम ने कहा कि उन्हें डर है कि कहीं जिस तर्ज पर सरकारी अधिकारियों के ग्रामीण प्रवास का उनका निर्देश केवल रस्म अदायगी बनकर रह गया। इसी तरह म्यरो स्कूल की अवधारणा का भी हाल न हो जाए। उन्होंने कहा कि इस सोच को एक सकल उत्तराखंडी अभियान का स्वरूप दिए बिना प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा की बुनियाद मजबूत नहीं हो सकती।
पूर्व सीएम ने लिखा है कि मुख्यमंत्री का पद संभालते हुए उन्हें लगा था कि उनका एक आदेश विशाल पत्थर को भी हिला सकता है। लेकिन छह साल बाद वह समझ चुके हैं कि मुख्यमंत्री पहाड़ हिला सकता है अधिकारी को नहीं हिला सकता। छोटे राज्य में तो स्थिति और कठिन है। हर कोई 25 से 50 वोटों को प्रभावित कर सकता है। यदि कर्मचारी नाराज हो गए तो पार्टी की छुट्टी हो सकती है। गुरू जी तो बिल्कुल भी नाराज नहीं होने चाहिए।