उत्तराखंड में किच्छा के इंदिरा गांधी खेल स्टेडियम के मैदान में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने जनता के समक्ष न्याय की गुहार लगाई।
भावुक अंदाज में सीएम ने अपनी पीड़ा को कुछ ऐसे अंदाज में रखा कि हजारों की भीड़ में महिला और पुरुष 26 मिनट तक सीएम के भाषण को गंभीर होकर सुनते रहे। घोषणाओं में माहिर माने जाने वाले मुख्यमंत्री हरीश रावत रविवार को किच्छा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित रैली में जनता के बीच कोई घोषणा करने के बजाए सिर्फ अपनी पीड़ा को ही किच्छावासियों के समक्ष रखते रहे।
उन्होंने जब भावुक होकर यह कहा कि एक हवाई दौरे के समय उनकी गर्दन की हड्डी टूट गई थी, ठीक एक साल तक उन्होंने गर्दन के इलाज के दौरान गले पर पट्टी बांधे रखा और जैसे ही वह ठीक हो पाई तो केंद्र सरकार में मोदी भइया ने उसे एक झटके में काट दिया। दल-बदल राजनीति के तहत उनकी चुनी हुई सरकार पर ऐसा वार किया कि राष्ट्रपति शासन लगाकर एक झटके में उनकी गर्दन काट डाली।
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने फिर अपने संबोधन में लोगों को दयाभाव का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले पहाड़ों में लोग बकरियों की चोरियां करते थे, गांवों में बकरियों के लिए कुछ हरा चारा दिखाकर उन्हें अपने घरों में ले जाते थे, ठीक उसी तरह से भाजपा के थानेदार मोदी ने भी मेरे दस विधायकों को बकरी की तरह न जाने कौन सा चारा दिखाया और उन्हें चुरा ले गए।
मैं आज भी सोचता हूं कि आखिर घर भी मेरा ही लूटा, गर्दन भी मेरी ही काटी और फिर मुकदमा भी मुझ पर ही कर दिया। मुख्यमंत्री ने किच्छा की जनता को न्याय की देवी मानते हुए कहा कि तुम्ही न्याय करो कि आखिर मेरा दोष क्या है। उन्होंने केंद्र सरकार को षड्यंत्र का खिलाड़ी करार दिया।
आपदा ने कमर तोड़ दी फिर भी डटा रहा
मुख्यमंत्री हरीश रावत ने किच्छा रैली में अपना दर्द खुलकर बयां किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जैसे ही सत्ता संभाली तो उत्तराखंड में आपदा की मार ऐसी पड़ी कि कमर ही टूट गई। केदारनाथ से लेकर पिथौरागढ़ तक आपदा ने कहर बरपाया। वह कमर कसे रहे और जिस केदारनाथ को 10 वर्षों तक यात्रा के लिए ठप मान रहे थे। उन्होंने उसे ठीक डेढ़ वर्ष के भीतर अपनी पटरी पर ला दिया। इस वर्ष करीब 15 हजार लोगों ने भगवान केदारनाथ के दर्शन किए।