सीएम हरीश रावत ने कैबिनेट मंत्रियों के बंटवारे में भी कई सियासी निशाने साध लिए।
जहां एक तरफ उन्होंने कैबिनेट मंत्रियों यशपाल आर्य, प्रीतम सिंह पंवार और दिनेश धनै को अतिरिक्त विभागों का प्रभार देकर और मजबूत बनाने की कोशिश की है, वहीं विभागों के बंटवारे के जरिए कुमाऊं- गढ़वाल के बीच पैदा हुई खाई को पाटने की कोशिश भी की है।
सीएम रावत ने गणेश गोदियाल, विजय पाल सजवाण, मदन सिंह बिष्ट, हेमेश खर्कवाल, विक्रम सिंह नेगी, राजकुमार, सरिता आर्या, मनोज तिवारी आदि विधायकों को उनके संबंधित विभागों के मंत्रियों के साथ संबद्ध कर और जिलों में हुए विकास कार्यों की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें और ताकतवर बनाने की पहल की है।
इतना ही नहीं सीएम रावत ने इन सभा सचिवों और विधायकों को जिलों में विकास कार्यों की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी सौंपकर यह संदेश देने की भी कोशिश की है कि उनका राजनीतिक रुतबा किसी कैबिनेट मंत्री से कम नहीं है। ज्ञात हो कि मंत्रिमंडल में दो विधायकों के समायोजित करने को लेकर कई विधायक दौड़ में शामिल थे। सीएम रावत ने कभी पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा खेमे में शामिल विधायकों को जिम्मेदारी सौंपकर उन्हें पुख्ता तरीके से अपने साथ जोड़ने की कोशिश की है।
इतना ही नहीं प्रीतम सिंह पंवार को उद्यान विभाग और दिनेश धनै को चिकित्सा शिक्षा जैसे अहम विभागों की जिम्मेदारी सौंपकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि सियासी संकट के दौरान पीडीएफ ने जो उनका साथ दिया, यह उसका इनाम है। सीएम रावत ने मंत्रियों के विभागों के बंटवारे और सभा सचिवों को जिलों की जिम्मेदारी सौंपने के मामले में गढ़वाल और कुमाऊं समीकरण का पूरा ख्याल रखा है।
जहां एक तरफ उन्होंने गणेश गोदियाल, विक्रम सिंह नेगी, डॉ. जीतराम, जैसे गढ़वाल क्षेत्र के विधायकों को तवज्जो दी है, वहीं मदन सिंह बिष्ट, सरिता आर्या, मनोज तिवारी, विजय पाल सजवाण जैसे कुमाऊं क्षेत्र के विधायकों को जिलों में विकास कार्यों की मॉनीटरिंग सौंपकर यह संदेश देने की कोशिश की है कि उनके लिए गढ़वाल और कुमाऊं सब बराबर हैं। ज्ञात हो कि पिछले कई माह से सीएम के ऊपर कुमाऊं को ज्यादा तवज्जो देने का आरोप प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय समेत गढ़वाल क्षेत्र के नेता लगाते रहे हैं। सीएम के इस कदम से अब शायद इस विवाद पर थोड़ा विराम लगे।