उम्रदराज हो चुके हैं रावत
हरीश रावत अब उम्रदराज हो चुके हैं। सक्रिय राजनीति में हरिद्वार से 2024 लोकसभा की आखिरी पारी खेलना चाहते हैं। अलग-अलग मंचों से इस इच्छा को जाहिर भी कर चुके हैं। हरीश रावत 2013 का लोकसभा चुनाव हरिद्वार से जीतकर ही केंद्र की सत्ता तक पहुंच चुके हैं। 2024 में हरीश रावत को राजनीतिक समीकरण भी अपने पक्ष में दिख रहे हैं। वजह उनकी बेटी अनुपमा और कांग्रेस के पांच विधायक हैं। अनुपमा हरिद्वार ग्रामीण सीट से विधायक हैं, जहां से हरीश रावत 2017 में हार गए थे।
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2022 के पंचायत चुनाव में कांग्रेस हरिद्वार बुरी तरह साफ हो गई
हरिद्वार नगर सीट को छोड़कर बाकी सीटों पर अल्पसंख्यक और ओबीसी मतदाताओं पर हरीश रावत की मजबूत पकड़ है। 2022 के पंचायत चुनाव में कांग्रेस हरिद्वार बुरी तरह साफ हो गई। इससे भाजपा के मौजूदा सांसद रमेश पोखरियाल सबसे अधिक गदगद हैं। इस जीत को निशंक 2024 का रिहर्सल और बोनस मान रहे हैं। लेकिन हरीश रावत ने निशंक के अलावा डॉ. हरक सिंह रावत को सोचने को मजबूर कर दिया है। भाजपा से कांग्रेसी में घर वापसी करने वाले हरक सिंह रावत भी हरिद्वार से लोकसभा लड़ना चाहते हैं। पंचायत चुनाव की हार से हरीश रावत ने अपनी सियासी पिच तैयार करने की शुरुआत कर दी है। कार्यकर्ताओं को भी एकजुट कर उनका विश्वास बढ़ाया है।